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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन के भाई समान सहयोगी सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई; 10 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि

झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। मासूम बेटे ने मुखाग्नि दी; पूरे राज्य में शोक की लहर।
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गिरिडीह के हरसिंहरायडीह घाट पर राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

गिरिडीह / रांची:

झारखंड की राजनीति और आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में शुमार राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन से पूरे झारखंड में गहरा शोक छा गया है। गिरिडीह स्थित उसरी नदी तट के हरसिंहरायडीह श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। पुलिस बल द्वारा शोक सलामी दिए जाने के बाद जब उनके 10 वर्षीय मासूम पुत्र ने चिता को मुखाग्नि दी, तो घाट पर उपस्थित हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।

Jharkhand Cabinet Minister Sudivya Kumar Sonu state funeral at Giridih Usri river ghat

गमगीन माहौल में दी गई अंतिम विदाई

झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन ने अपने गुमला स्थित सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर सीधे गिरिडीह पहुंचकर पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए और श्रद्धांजलि दी। इस भावुक क्षण पर उन्होंने कहा कि एक मासूम बेटे को पिता की चिता को मुखाग्नि देते देखना अत्यंत हृदयविदारक था। बचपन में अपने पिता को खोने के व्यक्तिगत दर्द का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह दृश्य जीवन भर याद रहने वाला और असहनीय है।

सदन से जमीन तक बेमिसाल रणनीतिकार

झारखंड अलग राज्य आंदोलन से उभरकर मुख्यधारा की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले सुदिव्य कुमार सोनू सदन में सरकार के सबसे प्रखर और तार्किक वक्ताओं में गिने जाते थे। विधानसभा में विपक्ष के कड़े सवालों और गतिरोध के बीच अपने तर्कों, विषय की गहरी समझ और प्रशासनिक पकड़ से वे सदैव मजबूत पक्ष रखते थे। स्थानीय भाषा और संस्कृति से गहरा जुड़ाव रखने वाले सोनू अपने सहयोगियों के लिए हमेशा एक कुशल मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे।

अधूरे रह गए विकास के विजन

पर्यटन, उच्च शिक्षा और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर उनके पास कई दूरदर्शी योजनाएं थीं। उनका असमय निधन न केवल गिरिडीह बल्कि संपूर्ण झारखंड की विधायी व्यवस्था और राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने घाट पर पहुंचकर दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को संबल देने की प्रार्थना की।

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