पुलिस की 'बलि' वाली थ्योरी पर भड़कीं अंबा प्रसाद, DGP पर साधा तीखा निशाना
हजारीबाग: विष्णुगढ़ के कुसुंभा गांव में मासूम बच्ची की निर्मम हत्या और दुष्कर्म के मामले में हजारीबाग पुलिस की एसआईटी (SIT) रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट साझा करते हुए पुलिस की जांच रिपोर्ट को 'चंदा मामा की कहानी' करार दिया है और सीधे तौर पर डीजीपी तदाशा मिश्र की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं।
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| Amba Prasad dwara social media per post Kiya Gaya post, |
पुलिस का दावा: 'अंधविश्वास और नरबलि' है वजह
हजारीबाग पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 24/25 मार्च की रात हुई इस घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने इसे 'नरबलि' का मामला बताया है। पुलिस का दावा है कि मृतका की मां ने अपने बेटे की मानसिक बीमारी को ठीक करने के लिए एक तांत्रिक (भगतनी) के कहने पर अपनी ही 13 वर्षीय बेटी की बलि दे दी। पुलिस ने इस मामले में मां रेशमी देवी, तांत्रिक शांति देवी और एक अन्य सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार किया है।
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| HAZARIBAGH POLICE DWARA JAARI PRESS VIGYAPTI, |
अंबा प्रसाद के गंभीर आरोप: "कहानी कच्ची है"
इस जांच रिपोर्ट के सामने आते ही पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
"विष्णुगढ़ पर कहानी लिखी भी तो इतनी कच्ची! पुलिस सेवा से रिटायर हो चुके DGP से कुछ बेहतर कहानी की आशा थी। आपने तो कांड का मकसद (Motive) ही बदल दिया।"
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने असली दोषियों को बचाने के लिए मामले को अंधविश्वास का रूप दे दिया है। उन्होंने डीजीपी पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या यह जांच रिपोर्ट किसी खास राजनीतिक दल के चैम्बर में तैयार की गई थी?
प्रेस कॉन्फ्रेंस से डीजीपी की दूरी पर सवाल
अंबा प्रसाद ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि इस महत्वपूर्ण खुलासे के लिए खुद डीजीपी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी, लेकिन उनकी जगह डीआईजी और एसपी ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने इसे 'तख्ता पलट' और मामले को गुमराह करने की कोशिश बताया है!
Naresh Soni Editor in Chief. www.newsprahari.in


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