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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग में अंधविश्वास की पराकाष्ठा: विष्णुगढ़ में मासूम की नरबलि का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा

हजारीबाग के विष्णुगढ़ में अंधविश्वास की बलि चढ़ी 13 वर्षीय मासूम। पुलिस ने तंत्र-मंत्र और नरबलि के सनसनीखेज मामले का खुलासा कर तीन आरोपियों को दबोचा।
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हजारीबाग में अंधविश्वास की पराकाष्ठा: विष्णुगढ़ में मासूम की नरबलि का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा

तंत्र-मंत्र और देवदोष दूर करने के नाम पर अपनों ने ही बुझा दिया घर का चिराग, पुलिस की एसआईटी टीम ने आरोपियों को भेजा जेल

हजारीबाग, झारखंड

झारखंड के हजारीबाग जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज में शिक्षा और जागरूकता के दावों पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्भा गाँव में बीते दिनों एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गई थी, जिसका पुलिस ने अब पूरी तरह से खुलासा कर दिया है। यह मामला महज एक हत्या का नहीं, बल्कि गहरी जड़ें जमाए हुए अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और नरबलि जैसी कुप्रथाओं का एक वीभत्स चेहरा है। पुलिस द्वारा की गई गहन जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जिस बच्ची को दुनिया की बुरी नजरों से बचाने की जिम्मेदारी उसके माता-पिता की थी, उसी मां ने तांत्रिक के बहकावे में आकर अपनी ही कोख उजाड़ दी।

हजारीबाग पुलिस की गिरफ्त में नरबलि कांड के आरोपीयों और जिले के सभी पदाधिकारियों संघ जांच में जुटी एसआईटी टीम।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब 25 मार्च 2026 की सुबह विष्णुगढ़ पुलिस को सूचना मिली कि कुसुम्भा गांव के मिडिल स्कूल के पीछे मैदान में झाड़ियों के पास एक नाबालिग बच्ची का क्षत-विक्षत शव पड़ा हुआ है। यह वही बच्ची थी जो एक दिन पहले यानी 24 मार्च की रात मंगला जुलूस के दौरान रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। शुरुआत में इस मामले को बलात्कार और हत्या के दृष्टिकोण से देखा जा रहा था, क्योंकि मृतिका की मां रेशमी देवी ने ही धनेश्वर पासवान और अन्य अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। लेकिन जब पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचनाओं को खंगाला, तो कहानी कुछ और ही निकलकर सामने आई।

जांच के दौरान पुलिस का शक गहराया और जब कड़ियों को जोड़ा गया तो मामला सीधे तौर पर तंत्र-मंत्र से जुड़ा पाया गया। पुलिस की पूछताछ में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि मृतिका की माँ रेशमी देवी पिछले एक साल से गाँव की ही एक कथित तांत्रिक शांति देवी उर्फ भगतिनी के संपर्क में थी। रेशमी देवी अपने बेटे सुधीर कुमार सिंह की शारीरिक और मानसिक बीमारी को लेकर काफी चिंतित रहती थी और उसे लगता था कि किसी ऊपरी साये की वजह से उसका बेटा ठीक नहीं हो पा रहा है। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए तांत्रिक भगतिनी ने उसके मन में यह बात बैठा दी कि उसके बेटे को तभी ठीक किया जा सकता है जब किसी कुंवारी कन्या की बलि दी जाए। भगतिनी ने बड़ी चालाकी से रेशमी को विश्वास दिलाया कि उसकी छोटी बेटी पर ही माता सवार रहती है और उसकी बलि देने से न केवल बेटा ठीक होगा बल्कि घर के सारे संकट दूर हो जाएंगे।

अंधविश्वास में अंधी हो चुकी मां अपनी ही बेटी की बलि देने के लिए तैयार हो गई। योजना के अनुसार रामनवमी के पर्व के दौरान इस कुकृत्य को अंजाम देने का समय तय किया गया। 24 मार्च की शाम जब पूरा गांव उत्सव में डूबा था, रेशमी देवी अपनी बेटी को लेकर तांत्रिक भगतिनी के घर पहुंची। भगतिनी ने पहले से ही बलि की पूरी तैयारी कर रखी थी। उसने यह भी निर्देश दिया था कि बलि के समय बच्ची को काबू करने के लिए एक पुरुष की आवश्यकता होगी, जिसके लिए भीम राम नामक व्यक्ति को शामिल किया गया। रात के सन्नाटे में जब गांव वाले उत्सव मना रहे थे, तब एक मासूम बच्ची को उसकी अपनी मां और तांत्रिक द्वारा मौत के घाट उतारने की पटकथा लिखी जा रही थी।

तांत्रिक भगतिनी के घर के भीतर स्थित मनसा मंदिर में पहले पूजा-पाठ का ढोंग किया गया। बच्ची को सिंदूर का टीका लगाया गया, काजल लगाया गया और प्रसाद के रूप में इलायची दाना खिलाया गया। इसके बाद उसे पास की एक बांसवाड़ी में ले जाया गया जिसे तांत्रिक अपना 'भूत बांधने का स्थान' कहती थी। वहां मासूम बच्ची को जमीन पर लेटा दिया गया। जैसे ही तंत्र-मंत्र का खेल शुरू हुआ, तांत्रिक ने दावा किया कि उस पर 'देवास' आ गया है और उसे कुमारी कन्या का खून चाहिए। इसके तुरंत बाद भीम राम ने बच्ची का गला घोंटना शुरू किया और अपनी ही कोख को कत्ल होते देख रही मां ने विरोध करने के बजाय अपनी तड़पती हुई बेटी के दोनों पैर मजबूती से पकड़ लिए ताकि वह हिल न सके।

बच्ची की जान निकलने के बाद भी दरिंदगी कम नहीं हुई। आरोपियों ने शव के साथ अत्यंत वीभत्स कृत्य किए। तांत्रिक के इशारे पर मृत बच्ची के शरीर के साथ छेड़छाड़ की गई और मंत्रोच्चार के बीच उसकी पवित्रता को खंडित करने का प्रयास किया गया। यही नहीं, भीम राम ने अपने साथ लाए पत्थर से बच्ची के सिर पर जोरदार प्रहार किया जिससे उसका चेहरा लहूलुहान हो गया। उस मासूम के बहते हुए खून को अंजुलि में भरकर तांत्रिक ने अपने मंदिर में छिड़का और शव पर उसी खून से पुताई कर अपनी आसुरी पूजा संपन्न की।

पुलिस ने इस जघन्य कांड में संलिप्त तीनों मुख्य आरोपियों—भीम राम, रेशमी देवी (मृतिका की मां) और शांति देवी उर्फ भगतिनी को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से अपराध में प्रयुक्त पत्थर, प्लास्टिक की बोरी और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की गई हैं। इस सफलता के पीछे विष्णुगढ़ और हजारीबाग पुलिस की एक बड़ी टीम का हाथ है, जिन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से मामले की गुत्थी सुलझाई। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि आज भी शिक्षा के अभाव और अंधविश्वास के जाल में फंसकर लोग कितने बड़े अपराध को अंजाम दे सकते हैं। फिलहाल तीनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन इस घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक। न्यूज़ प्रहरी।।

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