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Editor: Naresh Prasad Soni
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हाथी-मानव संघर्ष: हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने लोकसभा में उठाई आवाज़, मुआवजे और सुरक्षा पर नए कानून की मांग

सांसद मनीष जायसवाल ने लोकसभा में हाथी-मानव संघर्ष को बताया राष्ट्रीय संकट। मुआवजे और सुरक्षा के लिए नए कानून व अर्ली वार्निंग सिस्टम की मांग।
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हाथी-मानव संघर्ष: हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने लोकसभा में उठाई आवाज़, मुआवजे और सुरक्षा पर नए कानून की मांग

नई दिल्ली: लोकसभा में 'लोक महत्व के जरूरी मुद्दे' के दौरान हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने देश में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे केवल वन्यजीवों का मुद्दा न मानकर एक गंभीर 'राष्ट्रीय संकट' करार दिया। जायसवाल ने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि हाथियों के हमलों से होने वाली जान-माल की हानि को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और वर्तमान मुआवजा नीति में आमूलचूल बदलाव किया जाए।

लोकसभा में भाषण देते हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल (हाथी-मानव संघर्ष मुद्दा)

हाथियों का आतंक: जनवरी में ही 20 से अधिक मौतें

सांसद जायसवाल ने झारखंड के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अकेले जनवरी माह में हाथियों के साथ संघर्ष में 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि अब हाथी केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि रांची जैसे शहरों में एयरपोर्ट के पास भी बेखौफ घूमते देखे जा रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है संघर्ष? सांसद ने बताए मुख्य कारण

सदन को संबोधित करते हुए मनीष जायसवाल ने इस संकट के पीछे के मुख्य कारणों पर भी प्रकाश डाला

सिकुड़ते वन क्षेत्र: जंगलों के लगातार कटने से हाथियों के प्राकृतिक आवास कम हो रहे हैं।

अवैध माइनिंग: जंगलों में चल रही अवैध माइनिंग और भारी ट्रकों की आवाजाही से हाथियों की मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

भोजन और पानी की कमी: प्राकृतिक संसाधनों के समाप्त होने से हाथी भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।

सांसद की प्रमुख मांगें और सुझाव

सांसद ने केंद्र सरकार से इस दिशा में एक स्थायी समाधान निकालने की अपील की है

नया कानून और सुरक्षित कॉरिडोर: हाथियों के आवागमन के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर को सुरक्षित किया जाए।

अर्ली वार्निंग सिस्टम: हाथियों की मौजूदगी की जानकारी पहले से देने के लिए आधुनिक तकनीक (Early Warning System) स्थापित हो।

उम्र आधारित मुआवजा (Age-based Insurance): वर्तमान में मिलने वाली 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि को उन्होंने अपर्याप्त बताया। उन्होंने मांग की कि मुआवजा पीड़ित की उम्र और उसकी भविष्य की कमाई की क्षमता के आधार पर (Insurace model) तय किया जाना चाहिए।

Naresh Soni Editor in Chief.( www.newsprahari.in)***

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