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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh: हजारीबाग पुलिस का सख्त एक्शन: एसपी की समीक्षा बैठक में लंबित कांडों के निपटारे और अवैध खनन पर नकेल कसने का आदेश

 

जमीन विवाद से लेकर अवैध खनन तक, एसपी ने तय की जिम्मेदारी; लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का कड़ा निर्देश

हजारीबाग:

हजारीबाग पुलिस अधीक्षक अमन कुमार द्वारा जिले के सभी पुलिस उपाधीक्षकों, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों के साथ एक महत्वपूर्ण अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले की सुरक्षा व्यवस्था, लंबित कांडों के निपटारे और जनसुनवाई को लेकर कई कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

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अपराध नियंत्रण और लंबित कांडों पर फोकस

​बैठक में एसपी ने विशेष रूप से महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने निर्देश दिया कि महिला अत्याचार, छेड़खानी, रेप और पोक्सो (POCSO) से संबंधित सभी लंबित मामलों पर विशेष फोकस करते हुए उन्हें 60 दिनों के भीतर निष्पादित किया जाए। इसके अलावा, वर्ष 2025 से पूर्व के सभी लंबित कांडों को भी प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का आदेश दिया गया है।

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​जून महीने की उपलब्धि

​पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, हजारीबाग जिले के विभिन्न थानों में जून 2026 में 357 कांड दर्ज किए गए, जबकि पुलिस ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए 710 कांडों का निष्पादन किया। इसके साथ ही, 1052 वारंट/कुर्की, 215 चरित्र सत्यापन और 1306 पासपोर्ट आवेदनों का सफल निष्पादन किया गया।

​बैठक के मुख्य दिशा-निर्देश:

  • जमीन विवाद: प्रत्येक सप्ताह थाना दिवस का आयोजन होगा, जिसमें अंचलाधिकारी (CO) के साथ मिलकर जमीन विवादों का निपटारा किया जाएगा।
  • अवैध खनन व मादक पदार्थ: अवैध कोयला, बालू और पत्थर उत्खनन पर पूर्णतः रोक लगाने के लिए खनन विभाग के साथ समन्वय कर कठोर कार्रवाई होगी। साथ ही, मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के अड्डों को चिह्नित कर विशेष अभियान चलाया जाएगा।
  • संगठित अपराध: संगठित गिरोहों और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ CCA और गुंडा पंजी में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
  • अपराधियों पर नजर: जेल से छूटे विगत 5 वर्षों के अपराधियों की सूची तैयार कर उनकी गतिविधियों की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
  • जनसुनवाई: थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध तरीके से उनका समाधान करें।

​एसपी ने सभी अधिकारियों को साइबर अपराध के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने और साइबर कांडों में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही, बेहतर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

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Daru: जिनगा पंचायत भवन में पुलिस की पाठशाला, महिलाओं को दी साइबर अपराध और 'Zero FIR' की जानकारी!

​🚨 दारू: जिनगा पंचायत भवन में पुलिस की बड़ी पाठशाला; महिलाओं को दी साइबर अपराध, घरेलू हिंसा और 'Zero FIR' की जानकारी

दारू (हजारीबाग): ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से हजारीबाग पुलिस लगातार जन जागरूकता अभियान चला रही है। इसी कड़ी में रविवार (21 जून) को दारू थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह के नेतृत्व में थाना क्षेत्र के ग्राम जिनगा स्थित पंचायत भवन में एक विशेष जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिलाएं, युवतियां और पंचायत के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Daru: Police hold an awareness session at the Jinga Panchayat Bhawan; women informed about cybercrime and 'Zero FIR'

📋 इन गंभीर सामाजिक और आपराधिक विषयों पर किया गया जागरूक

​थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने उपस्थित महिलाओं और जनप्रतिनिधियों को वर्तमान समय में होने वाले विभिन्न अपराधों और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया:

  • नशा मुक्ति और बाल विवाह: समाज को खोखला कर रही नशे की लत से बच्चों को दूर रखने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की गई।
  • घरेलू हिंसा और मानव तस्करी: महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा और सीधे-साधे ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर होने वाले मानव व्यापार (Human Trafficking) के खिलाफ कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई।
  • साइबर अपराध व धोखाधड़ी: फोन पर आने वाले अनजान कॉल, लॉटरी के झांसे और अनजान व्यक्तियों को परिचित मानकर अपनी गोपनीय जानकारी (जैसे ओटीपी, बैंक डिटेल) साझा न करने की सलाह दी गई, ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके।
  • नाबालिग बच्चों का रख-रखाव: माता-पिता को अपने नाबालिग बच्चों की गतिविधियों, उनके रख-रखाव और उनके मानसिक व शारीरिक बदलावों पर विशेष ध्यान देने का तरीका बताया गया।

​💡 समय पर सूचना देने की अपील और 'Zero FIR' की दी गई अहम जानकारी

​बैठक के दौरान थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति सशक्त बनाते हुए दो बेहद महत्वपूर्ण बातें बताईं:

  1. ससमय सूचना (Timely Information): क्षेत्र में होने वाले किसी भी आपराधिक मामले, संदिग्ध गतिविधि या अप्रिय घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते बड़ी वारदात को रोका जा सके। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।
  2. जीरो एफआईआर (Zero FIR): महिलाओं और ग्रामीणों को जानकारी दी गई कि यदि अपराध किसी दूसरे थाना क्षेत्र में भी हुआ हो, तो पीड़ित किसी भी नजदीकी थाने (जैसे दारू थाना) में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। पुलिस बिना क्षेत्र का विवाद किए 'जीरो एफआईआर' दर्ज करेगी और बाद में उसे संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

​बैठक के अंत में उपस्थित महिलाओं और जनप्रतिनिधियों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और एक भयमुक्त व जागरूक समाज बनाने में पुलिस प्रशासन का पूर्ण सहयोग करने का संकल्प लिया।

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झारखंड: महिला आयोग की अनुपस्थिति पर अंबा प्रसाद का तीखा प्रहार, जल्द गठन की मांग

झारखंड: महिला आयोग की अनुपस्थिति पर अंबा प्रसाद का तीखा प्रहार, जल्द गठन की मांग

सम्पादकीय 
Amba Prasad 

रांची: झारखंड की राजनीति में महिलाओं के अधिकारों की आवाज बुलंद करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द राज्य महिला आयोग के गठन की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयोग के अस्तित्व में न होने के कारण राज्य की आधी आबादी को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

न्याय की आस में भटक रही हैं महिलाएं

अंबा प्रसाद ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आयोग केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय का एक सुलभ द्वार है। इसकी अनुपस्थिति में घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और अन्य अपराधों की शिकायतों का निपटारा समय पर नहीं हो पा रहा है।

"जब जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं, तो आम महिला का क्या?"

अंबा प्रसाद ने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए एक बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, "मैं खुद एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हूँ। जब एक विधायक स्तर की महिला को न्याय पाने में इतनी कठिनाई हो रही है, तो दूर-दराज के गांवों में रहने वाली आम महिलाओं की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है।"

आयोग न होने के गंभीर दुष्परिणाम

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिला आयोग के न होने से निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं:

सुनवाई में देरी: पुलिस थानों के चक्कर लगाने के बाद भी महिलाओं को उचित परामर्श और कानूनी सहायता नहीं मिल पाती।

असुरक्षा का माहौल: अपराधियों के मन में डर कम होता है क्योंकि उन्हें पता है कि त्वरित निगरानी करने वाली कोई संस्था सक्रिय नहीं है। 

सरकारी योजनाओं का लाभ: महिलाओं के कल्याण के लिए बनी योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित होती है।

झारखंड सहित देश के कई राज्यों में महिला आयोगों के खाली पड़े पद एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय हैं। अंबा प्रसाद की यह मांग न केवल राजनीतिक है, बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार को चाहिए कि वह राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए इस संवैधानिक संस्था को अविलंब पुनर्जीवित करे।

क्या आपको लगता है कि महिला आयोग के बिना न्याय मिलना कठिन है?

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