हजारीबाग 'सीता' हत्याकांड: पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का तीखा आंदोलन, डीसी-एसपी का पुतला दहन कर की CBI जांच की मांग
हजारीबाग में न्याय की पुकार: प्रशासन की चुप्पी पर भड़का आक्रोश
हजारीबाग/बिष्णुगढ़: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में हुई एक मासूम बच्ची (जिसे अंबा प्रसाद ने 'सीता' का नाम दिया है) के साथ बलात्कार और जघन्य हत्या के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली होने पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को हजारीबाग के जिला चौक पर अंबा प्रसाद के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
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| हजारीबाग जिला चौक पर डीसी और एसपी का पुतला दहन करतीं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद एवं अन्य कार्यकर्ता। |
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बांह पर काला बिल्ला लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। आक्रोशित भीड़ ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए हजारीबाग के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) का पुतला दहन किया। कैंडल मार्च निकालते हुए न्याय की मांग की गई और अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई।
निर्भया कांड से भी दर्दनाक है यह घटना: अंबा प्रसाद
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अंबा प्रसाद ने कहा कि विष्णुगढ़ की यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। उन्होंने इसकी तुलना दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड से करते हुए कहा कि यह उससे भी अधिक घृणित और हृदयविदारक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगला जुलूस के दौरान हुई इस घटना के बाद से पुलिस अनुसंधान की गति अत्यंत धीमी है, जो प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
अंबा प्रसाद ने घोषणा की कि वे एक अधिवक्ता होने के नाते पीड़ित परिवार को हर संभव न्यायिक सहायता प्रदान करेंगी और स्वयं अदालत में उनका केस लड़ेंगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब तक 'सीता' को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुँचाया जाता, तब तक उनका संघर्ष थमेगा नहीं।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: एसपी और डीएसपी पर कार्रवाई की मांग
इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप के लिए अंबा प्रसाद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने हजारीबाग पुलिस की विफलताओं का विस्तार से उल्लेख किया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि
CBI जांच: स्थानीय पुलिस की विफलता को देखते हुए इस कांड का अनुसंधान तत्काल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाए।
प्रशासनिक फेरबदल: कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले हजारीबाग एसपी का स्थानांतरण किया जाए और संबंधित डीएसपी व विष्णुगढ़ थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित किया जाए।
मुआवजा और पुनर्वास: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और उनके पुनर्वासन की व्यवस्था सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाए।
महिला आयोग का गठन: राज्य में लंबित महिला आयोग का जल्द से जल्द गठन किया जाए ताकि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर त्वरित निगरानी हो सके।
लोकतंत्र और सुरक्षा पर उठते सवाल
हजारीबाग पुलिस की वर्तमान कार्यशैली से आम जनता का भरोसा डगमगा रहा है। अंबा प्रसाद ने पत्र में आशंका जताई है कि या तो पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है या फिर साक्ष्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान का वादा करने वाली सरकार में अगर एक मासूम को न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह व्यवस्था की हार है।
इस विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में स्थानीय लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने एक स्वर में अपराधियों को फांसी देने की मांग की। क्षेत्र में तनाव और आक्रोश को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक (न्यूज़ प्रहरी)

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