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Editor: Naresh Prasad Soni
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चट्टी बारियातू आंदोलन: जेल से छूटे विस्थापित रैयत, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद से मिलकर जताया आभार

केरेडारी के चट्टी बारियातू कोयला खनन परियोजना के आंदोलनकारी रैयतों को न्यायालय से जमानत मिल गई है। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने पूर्व विधायक अंबा
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चट्टी बारियातू आंदोलन: जेल से छूटे विस्थापित रैयत, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद से मिलकर जताया आभार

हजारीबाग: केरेडारी थाना क्षेत्र के अंतर्गत चट्टी बारियातू कोयला खनन परियोजना के जिन विस्थापित रैयतों को पिछले दिनों पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था उन्हें न्यायालय से जमानत मिल गई है। रिहाई के बाद शनिवार को इन सभी ग्रामीणों ने सीधे पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और इस न्यायिक लड़ाई में उनके निरंतर सहयोग के लिए गहरा आभार व्यक्त किया।
"जेल से रिहाई के बाद पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के आवास पर पहुंचकर उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते चट्टी बारियातू के विस्थापित रैयत।"


जेल से बाहर आए विस्थापित ग्रामीणों ने बताया कि इस संघर्षपूर्ण लड़ाई में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव हर कदम पर उनके साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इसी सहयोग और उचित कानूनी मार्गदर्शन का परिणाम है कि वे सभी होली के त्योहार से पहले ही सुरक्षित जेल से बाहर आ सके हैं।
इस अवसर पर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने वर्तमान भाजपा विधायक पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान विधायक ने मीडिया में भ्रामक बयानबाजी करते हुए कहा था कि पुलिस प्रशासन ने योगेंद्र साव और निर्मला देवी को छोड़कर बाकी सभी को जेल भेज दिया है जबकि यह वास्तविकता से कोसों दूर है। अंबा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए रैयतों को जमानत दिलवाई है।

अंबा प्रसाद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के दिन पुलिस ने एक साजिश के तहत बाकी ग्रामीणों को दूसरी जगह छिपा कर रखा और गुपचुप तरीके से जेल भेज दिया अन्यथा उनकी गिरफ्तारी नहीं होने दी जाती। पूर्व विधायक ने नसीहत देते हुए कहा कि वर्तमान विधायक को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए केवल बयानबाजी करने से बचना चाहिए और इसके बजाय रैयतों के हक और अधिकार की जमीनी लड़ाई में उनका साथ देना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीणों को इतने कम समय के भीतर न्यायालय से जमानत मिलना इस बात को प्रमाणित करता है कि ग्रामीण अपने जायज हक के लिए आंदोलन कर रहे थे और प्रशासन ने उन्हें बलपूर्वक झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे और उनका पूरा परिवार विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह से समर्पित है और किसी भी ग्रामीण के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब प्रशासन कॉर्पोरेट के दबाव में आकर काम करने लगता है तब न्यायपालिका ही एकमात्र उम्मीद बचती है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि वह निडर होकर विस्थापित ग्रामीणों को उनका वास्तविक अधिकार दिलाएगी। अंत में अंबा प्रसाद ने कहा कि संविधान सर्वोपरि है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यही संविधान ग्रामीणों को उनका छीना हुआ हक वापस दिलाएगा।


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