हजारीबाग जिला प्रशासन की अनूठी पहल: 'पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान' अभियान शुरू, आपकी अनुपयोगी किताबें संवारेंगी किसी का उज्जवल भविष्य
"प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए डीसी की विशेष अपील; नए समाहरणालय भवन के कमरा संख्या A-206 में जमा होंगी पुस्तकें"— न्यूज़ प्रहरी विशेष
प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): जिला जनसंपर्क कार्यालय (PRD), हजारीबाग (दिनांक: 10 जून 2026)
हजारीबाग:
शिक्षा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन ने एक अत्यंत अनुकरणीय और मानवीय पहल की शुरुआत की है। हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा आधिकारिक तौर पर "पुस्तक दान, ज्ञान का सम्मान" अभियान का शंखनाद किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सक्षम नागरिकों, सफल छात्रों और प्रबुद्ध समाज के घरों में रखी ऐसी प्रतियोगी किताबों को स्वेच्छा से दान कराना है, जो उनके उपयोग में नहीं हैं। प्रशासन इन किताबों को सहेजकर उन मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तक पहुंचाएगा, जो पैसों के अभाव में महंगी पुस्तकें खरीदने में असमर्थ हैं।
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"ज्ञान बांटिए, अवसर बढ़ाइए" – एक पुस्तक बदल सकती है किसी का भविष्य
शेयर किए गए आधिकारिक पोस्टर के अनुसार, जिला प्रशासन हजारीबाग ने आम जनता और युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि:
"आपकी अनुपयोगी पुस्तकें, किसी का उज्जवल भविष्य बन सकती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकों का दान करें और जरूरतमंद विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दें। आपके द्वारा दान दी गई पुस्तकें हजारीबाग जिले के विभिन्न पुस्तकालयों (Libraries) एवं अध्ययन केंद्रों में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।"
इन प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें की जा सकती हैं दान
अगर आपके पास या आपके परिचितों के पास निम्नलिखित प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित NCERT, सामान्य अध्ययन, भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity), अर्थशास्त्र, गणित, भौतिकी, पर्यावरण या समसामयिकी (Current Affairs) की किताबें उपलब्ध हैं, तो आप उन्हें इस महाभियान में दान कर सकते हैं:
- सिविल सेवा: UPSC और JPSC
- तकनीकी व चिकित्सा: JEE और NEET
- बैंकिंग व रेलवे: Banking और Railway
- कर्मचारी चयन व शिक्षक पात्रता: SSC, JTET, CTET और CUET
- एवं अन्य तमाम प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकें।
📍 पुस्तक जमा करने का स्थान और समय नोट करें
हजारीबाग जिला प्रशासन ने पुस्तकों के संग्रहण के लिए समाहरणालय में एक समर्पित केंद्र बनाया है, जहां कोई भी नागरिक अपनी पुस्तकें सुरक्षित जमा करा सकता है:
- स्थान (Venue): जिला योजना कार्यालय, कमरा संख्या A-206, द्वितीय तल्ला (Second Floor), नया समाहरणालय भवन, हजारीबाग।
- कार्यालय समय (Office Time): सुबह 10:30 AM से शाम 05:00 PM तक (कार्य दिवसों में)।
जनहित में जारी अपील: हजारीबाग जिला प्रशासन समस्त जिलावासियों, कोचिंग संस्थानों, और प्रबुद्ध नागरिकों से पुरजोर अपील करता है कि आप सभी इस पुनीत शिक्षा अभियान में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व सामाजिक ज्ञान / Campaign Insights)
📌 जानिए क्यों हजारीबाग के लिए गेम-चेंजर साबित होगा यह पुस्तक दान अभियान?
- डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क से जुड़ाव: हजारीबाग जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुस्तकालय क्रांति चला रहा है। इस अभियान से एकत्रित पुस्तकें सुदूर प्रखंडों की लाइब्रेरी तक पहुंचेंगी, जिससे सुदूर गांवों के युवाओं को भी UPSC-JPSC का स्टडी मटेरियल घर के पास मिल सकेगा।
- रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण: पुरानी किताबों को कबाड़ में फेंकने या बेचने के बजाय दोबारा उपयोग में लाना रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है। एक पुरानी किताब किसी नए छात्र के लिए पूर्णतः नई मार्गदर्शिका बन जाती है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: किताबों की अलमारियों से निकलकर युवाओं के हाथों तक पहुंचे ज्ञान (Editorial)
कबाड़ में जाने वाली किताबें जब पुस्तकालयों की शान बनेंगी, तभी हजारीबाग का हर तबका 'आईएएस-आईपीएस' बनने का सपना देख सकेगा
हजारीबाग हमेशा से झारखंड का 'एजुकेशन हब' रहा है, लेकिन आज भी यहां सैकड़ों ऐसे छात्र हैं जो सिर्फ इसलिए प्रतियोगिता की दौड़ में पिछड़ जाते हैं क्योंकि वे चार से पांच हजार रुपये के बुक-सेट्स नहीं खरीद पाते। जिला प्रशासन की यह पहल सीधे तौर पर समाज के दो वर्गों को आपस में जोड़ती है—एक वो जो सफल हो चुके हैं और जिनकी किताबें अलमारियों में धूल फांक रही हैं, और दूसरे वो जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। 'न्यूज प्रहरी' प्रशासन के इस कदम की भूरि-भूरि सराहना करता है। हमारा मानना है कि शहर के बड़े स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को भी अपने स्तर पर 'बुक ड्रॉप बॉक्स' लगाना चाहिए, ताकि छात्र आसानी से इस अभियान का हिस्सा बन सकें।

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