चतरा में विकास योजनाओं के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन गंभीर: उपायुक्त रवि आनंद ने वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा कर दिए कड़े निर्देश
"वनाधिकार अधिनियम, एनओसी और ग्राम सभा के प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने का आदेश; आपसी समन्वय से दूर होंगी तकनीकी बाधाएं"— उपायुक्त
प्रशासनिक ब्यूरो, चतरा
- रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (IPRD), चतरा
चतरा:
चतरा समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त रवि आनंद की अध्यक्षता में वन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के भीतर चल रही विभिन्न महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में वन विभाग से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं, जटिलताओं और अनुमतियों (क्लियरेंस) के कारण रुके या लंबित पड़े मामलों की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की गई।
![]() |
| चतरा में सड़क, बिजली और पानी की बंद पड़ी योजनाओं को चालू करने के लिए उपायुक्त रवि आनंद ने एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं!" |
सड़क, बिजली और पानी जैसी जन-उपयोगी योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा
समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने विद्युत संचरण परियोजनाओं (पावर ट्रांसमिशन), पेयजलापूर्ति पाइपलाइन, सड़क निर्माण, तथा पुल-पुलिया सहित अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के उन मामलों की गहन जांच की, जो वनाधिकार अधिनियम (FRA), अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) अथवा वन विभाग की अन्य आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अटके हुए हैं। उपायुक्त रवि आनंद ने बैठक में मौजूद विभिन्न विभागों के कार्यपालक अभियंताओं से योजनावार जमीनी प्रगति की जानकारी प्राप्त की और सभी लंबित फाइलों के त्वरित निष्पादन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
ग्राम सभा का आयोजन कर वनाधिकार समिति से प्रस्ताव पास कराने का निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि जिन विकास योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन हेतु नियमानुसार ग्राम सभा का आयोजन आवश्यक है, उन मामलों में बिना किसी देरी के ग्राम सभा बुलाई जाए। ग्राम सभा से पारित प्रस्तावों को सबसे पहले अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति से अनुमोदित कराया जाए और तत्पश्चात जिला स्तरीय वनाधिकार समिति से अंतिम स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया समय सीमा के भीतर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल और समन्वय स्थापित करते हुए सभी आवश्यक कागजी व विधिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करें, ताकि जनहित से जुड़ी इन विकास योजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सके और आम जनता को इसका लाभ समय पर मिल सके।
उपायुक्त ने सभी संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लंबित मामलों का नियमित रूप से अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) करें और विभागीय समन्वय के माध्यम से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें।
बैठक में कई वरीय प्रशासनिक और वन अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे:
- राहुल मीणा (वन प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तरी चतरा प्रमंडल)
- मुकेश कुमार (वन प्रमंडल पदाधिकारी, दक्षिणी चतरा प्रमंडल)
- अरविंद कुमार (अपर समाहर्ता, चतरा)
- जहूर आलम (अनुमंडल पदाधिकारी, चतरा)
- विभिन्न कार्यपालक अभियंता एवं संबंधित तकनीकी विभागों के कर्मचारी।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व प्रशासनिक ज्ञान / Forest Clearance Framework)
📌 जानिए क्या है वनाधिकार अधिनियम (FRA) और विकास योजनाओं में इसकी भूमिका?
- अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वनाधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006: इस कानून के तहत वन भूमि पर बुनियादी ढांचागत विकास (जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी की पाइपलाइन) के लिए डायवर्जन हेतु स्थानीय ग्राम सभा की लिखित सहमति और अनापत्ति अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी गैर-वानिकी कार्य वन क्षेत्र में नहीं हो सकता।
- त्रि-स्तरीय वन समिति ढांचा: एफआरए के तहत किसी भी सरकारी योजना को पास करने के लिए प्रस्ताव पहले 'ग्राम सभा' से 'अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति' (SDLC) जाता है, और वहां से अंतिम मोहर के लिए 'जिला स्तरीय वनाधिकार समिति' (DLC) के पास पहुंचता है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं उपायुक्त करते हैं।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: वन विभाग और कार्यदायी संस्थाओं में तालमेल ही चतरा के विकास की कुंजी (Editorial)
एनओसी की फाइलों में दबे जनहित के प्रोजेक्ट्स: समयबद्ध जवाबदेही से ही बदलेगी चतरा की सूरत
चतरा जिला भौगोलिक रूप से घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहाँ विकास की कोई भी किरण (चाहे वह पानी की पाइपलाइन हो या बिजली के खंभे) वन विभाग के क्लियरेंस के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। उपायुक्त रवि आनंद द्वारा बुलाई गई यह समीक्षा बैठक बेहद सामयिक है, क्योंकि अक्सर वन विभाग और लोक निर्माण या विद्युत विभाग के बीच समन्वय की कमी से फाइलें महीनों लटकी रहती हैं। सरकार की नीतियां कितनी भी अच्छी हों, लेकिन जब तक अनुमंडल और जिला स्तर की वनाधिकार समितियां डेडलाइन तय करके काम नहीं करेंगी, तब तक ग्रामीण जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी। अधिकारियों को कागजी पत्राचार के जाल से बाहर निकलकर ऑन-फील्ड जॉइंट सर्वे पर ध्यान देना होगा, तभी चतरा विकास की मुख्यधारा से तेज गति से जुड़ पाएगा।

No comments
Post a Comment