जीएम इंटर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न: जे.गुरुजी ऐप और रेल प्रोजेक्ट के जरिए बदलेगा शिक्षण का तरीका
"प्रशिक्षक डॉ. पुरुषोत्तम कुमार सिंह और गगन कुमार ने डिजिटल टूल्स, ई-विद्यावाहिनी और वोकेशनल कोर्सेज पर दिया विशेष प्रशिक्षण; प्राचार्य शंभू कुमार ने जताया आभार"— न्यूज़ प्रहरी विशेष
शिक्षा संवाददाता, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): मीडिया प्रभारी, जीएम इंटर महाविद्यालय (दिनांक: 10 जून 2026)
हजारीबाग:
हजारीबाग के प्रतिष्ठित जीएम इंटर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के सफल क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय सघन प्रशिक्षण शिविर का शानदार समापन हो गया। इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक और डिजिटल शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना था, ताकि क्लासरूम के भीतर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान की जा सके। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य शंभू कुमार समेत कॉलेज के समस्त शिक्षक और शिक्षिकाएं मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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| 🏫 एजुकेशन अपडेट: हजारीबाग के जीएम इंटर कॉलेज में दो दिवसीय एनईपी 2020 शिक्षक कार्यशाला संपन्न; सीखे डिजिटल टूल्स। |
NEP 2020 और 'जे.गुरुजी ऐप' के हर पहलू पर विस्तार से चर्चा
कार्यशाला के दौरान मुख्य प्रशिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली और इंटर स्तरीय शिक्षा में आए क्रांतिकारी बदलावों के प्रत्येक पहलू पर विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही, झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'जे.गुरुजी ऐप' (J.Guruji App) की बारीकियों को समझाया गया। शिक्षकों को ऐप के अंतर्गत संचालित होने वाले महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की ट्रेनिंग दी गई, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- रेल प्रोजेक्ट (Project RAIL): बच्चों के नियमित मूल्यांकन और लर्निग आउटकम को सुधारने की तकनीक।
- ई-विद्यावाहिनी (E-Vidyavahini): शिक्षकों और छात्रों की डिजिटल उपस्थिति तथा डेटा प्रबंधन।
- उल्लास (ULLAS Initiative): नव-साक्षरों और सार्वजनिक शिक्षा के तहत जीवन कौशल सिखाने की पद्धति।
- वोकेशनल कोर्सेज (Vocational Courses): बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ हुनरमंद और रोजगारपरक बनाने के तरीके।
- डिजिटल टीचर नोट्स (Teacher Notes): क्लासरूम में जाने से पहले आधुनिक और प्रभावी पाठ योजना तैयार करना।
शिक्षकों के लिए 'मील का पत्थर' साबित होगी यह कार्यशाला
प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मुख्य वक्ता और प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित डॉ. पुरुषोत्तम कुमार सिंह एवं गगन कुमार ने क्लासरूम मैनेजमेंट से लेकर महाविद्यालय प्रबंधन तक के सफर पर प्रकाश डाला। दोनों विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युग में बच्चों के सर्वांगीण (सार्वजनिक) विकास के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल टूल्स का समावेश बेहद जरूरी है।
महाविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, जीएम इंटर महाविद्यालय के शिक्षकों के लिए यह कार्यशाला एक मील का पत्थर साबित होगी। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने न केवल नई तकनीकों और सरकारी पोर्टल्स को चलाना सीखा, बल्कि इस बात का संकल्प भी लिया कि वे इस दो दिवसीय ज्ञान का शत-प्रतिशत उपयोग अपने दैनिक शिक्षण कक्ष (क्लासरूम) में करेंगे।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन
कार्यशाला के अंतिम सत्र में शिक्षकों के प्रदर्शन और उनके उत्साह की सराहना की गई। इसके बाद, जीएम इंटर महाविद्यालय के प्राचार्य शंभू कुमार ने दोनों प्रशिक्षकों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और अपने धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस दो दिवसीय ऐतिहासिक प्रशिक्षण शिविर के समापन की आधिकारिक घोषणा की।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व तकनीकी ज्ञान / Educational Tools Knowledge)
📌 जानिए क्या हैं जे.गुरुजी ऐप, ई-विद्यावाहिनी और रेल प्रोजेक्ट?
- जे.गुरुजी (J.Guruji) मोबाइल ऐप: झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) द्वारा विकसित एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्रों के लिए ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर्स, क्विज़ और शिक्षकों के लिए पाठ्य सामग्रियां उपलब्ध हैं।
- प्रोजेक्ट रेल (Regular Assessment for Improved Learning - RAIL): यह शिक्षा की गुणवत्ता को मापने का एक राज्यव्यापी पैमाना है, जिसके तहत विद्यालयों में हर सप्ताह या निश्चित अंतराल पर वस्तुनिष्ठ परीक्षाएं ली जाती हैं, ताकि यह पता चल सके कि बच्चे क्लास में क्या सीख रहे हैं।
- ई-विद्यावाहिनी पोर्टल: यह झारखंड सरकार का एक सेंट्रलाइज्ड स्कूल मॉनिटरिंग सिस्टम है, जो बायोमेट्रिक अटेंडेंस, स्कूल फंड ट्रैकिंग और छात्रवृत्ति के डेटा को पूरी पारदर्शिता के साथ प्रबंधित करता है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: डिजिटल युग में शिक्षकों का अपग्रेड होना वक्त की मांग (Editorial)
सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, शिक्षकों का मानसिक अपग्रेडेशन ही बदलेगा शिक्षा का स्तर: जीएम इंटर कॉलेज की पहल सराहनीय
अक्सर देखा जाता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) की बातें कागजों और बड़े सेमिनारों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन हजारीबाग के जीएम इंटर महाविद्यालय ने अपने शिक्षकों को सीधे जमीन पर उतारकर ट्रेनिंग दी है, जो जिला शिक्षा जगत के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। 'जे.गुरुजी ऐप' और 'ई-विद्यावाहिनी' जैसे टूल्स आज के समय में अनिवार्य हो चुके हैं। लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या सरकारी और एडेड कॉलेजों के शिक्षक इस तकनीकी बदलाव को खुले दिल से अपना पाते हैं या नहीं। डॉ. पुरुषोत्तम कुमार सिंह और गगन कुमार जैसे प्रशिक्षकों की यह पहल तभी सफल मानी जाएगी, जब क्लासरूम के भीतर छात्र सचमुच 'प्रोजेक्ट रेल' और वोकेशनल कोर्सेज का लाभ उठा सकेंगे। कॉलेज के प्राचार्य शंभू कुमार इस दूरदर्शी आयोजन के लिए बधाई के पात्र हैं।

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