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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Jharkhand Mining News: डुमरी विधायक जयराम महतो ने उठाई झारखंड के सेस और रॉयल्टी हक की आवाज, पीएम मोदी को लिखा कड़ा पत्र

 

खान एवं खनिज संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार की मांग: डुमरी विधायक जयराम महतो ने पीएम मोदी को लिखा पत्र; झारखंड के हक और राजस्व नुकसान पर जताई चिंता

राँची/डुमरी। डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र प्रेषित कर 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने का आग्रह किया है। 20 अगस्त 2026 को जारी इस पत्र (पत्रांक: MLA/DUM/0579/2026) में उन्होंने संसद के मानसून सत्र में पारित इस विधेयक से झारखंड को होने वाले भारी वित्तीय व राजस्व नुकसान की ओर ध्यान आकर्षित कराया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो का आधिकारिक पत्र

विधेयक से राज्य के राजस्व और अधिकारों पर पड़ेगा विपरीत असर

  • अतिरिक्त कर व सेस पर रोक: विधायक ने पत्र में उल्लेख किया है कि इस विधेयक के पास होने से खनिजों और खनिज-धारित भूमि पर राज्य सरकारों द्वारा अतिरिक्त कर, उपकर (सेस) या अन्य शुल्क लगाने के अधिकार सीमित हो जाएंगे।
  • मिनरल मैप में झारखंड की अहमियत: देश के 40% खनिज संसाधन, कोयला, आयरन-ओर, कॉपर व बॉक्साइट का बड़ा हिस्सा झारखंड में है। राज्य का Gross State Value Added (GSVA) और विकास काफी हद तक खनिज संसाधनों पर निर्भर है।
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 का गणित: वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय मद में लगभग 18,273 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ऐसे में सेस और रॉयल्टी व्यवस्था प्रभावित होने से राज्य की आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है।

13,800 करोड़ रुपये के सेस राजस्व का नुकसान

​जयराम महतो ने पत्र में बताया कि The Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Rules, 2024 के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने 13,800 करोड़ रुपये का राजस्व केवल सेस से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।

  • ​अप्रैल से जुलाई 2026 तक ही राज्य को 4,400 करोड़ रुपये सेस के रूप में प्राप्त हो चुके हैं।
  • ​केंद्र के इस MMDR संशोधन से राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला यह सेस बंद हो जाएगा, जिससे विकास व जनकल्याणकारी योजनाओं पर सीधा दबाव पड़ेगा।

1.36 लाख करोड़ रॉयल्टी और विस्थापितों का दर्द

  • रॉयल्टी का बकाया: राज्य सरकार का केंद्र के पास कोयला रॉयल्टी के रूप में 1.36 लाख करोड़ रुपये का दावा लंबे समय से लंबित है।
  • रैयतों का विस्थापन: झारखंड के रैयतों ने खदानों के लिए अपनी ज़मीनें दी हैं और वे विस्थापन, पलायन व प्रदूषण का दंश झेल रहे हैं। ऐसे में राज्य की 4 करोड़ जनता के साथ न्याय करने की जरूरत है।

​उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राज्य के सर्वांगीण विकास और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप इस विधेयक को वापस लेकर पुनः समीक्षा की जाए।

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Giridih News: डुमरी के दलान चलकरी गांव में पहुंचेगी पक्की सड़क और पेयजल, विधायक जयराम महतो ने बांटा राशन

 

Giridih News: आज़ादी के दशकों बाद दलान चलकरी गांव में पहुंचेगी पक्की सड़क और पेयजल; विधायक जयराम महतो ने 32 आदिवासी परिवारों को बांटा एक माह का राशन

गिरिडीह (न्यूज़ प्रहरी डेस्क): गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत छछन्दो पंचायत का दूरस्थ 'दलान चलकरी' गांव आज़ादी के सात दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा है.


पारसनाथ पहाड़ की तलहटी में स्थित इस दुर्गम और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे आदिवासी बाहुल्य गांव में अब विकास की नई शुरुआत होने जा रही है। डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने गांव का दौरा कर ग्रामीणों से किए अपने वादे को पूरा करते हुए 32 आदिवासी परिवारों को एक महीने का राशन उपलब्ध कराया।

Dumri MLA Jairam Kumar Mahato distributing one month ration to tribal families in Dalan Chalkari village Giridih,

हत्याकांड के बाद दौरे में दिया था मदद का आश्वासन

​उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व गांव में एक आदिवासी दंपति की दर्दनाक हत्या हो गई थी। घटना के बाद जब विधायक जयराम कुमार महतो गांव पहुंचे थे, तब ग्रामीणों ने बरसात के मौसम में सड़क न होने के कारण बाज़ार तक पहुंचने और भोजन जुटाने में आ रही भारी दिक्कतों से अवगत कराया था। विधायक ने उसी समय ग्रामीणों की सहायता का भरोसा दिलाया था।

पक्की सड़क और सोलर पानी टंकी की अनुशंसा

​विधायक ने बताया कि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने और पक्की सड़क के निर्माण के लिए प्रशासनिक अनुशंसा कर दी गई है। इस संबंध में गिरिडीह के उपायुक्त (DC) से भी दूरभाष और पत्राचार के माध्यम से विस्तार से चर्चा हुई है। इसके अलावा गांव में व्याप्त पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए सोलर संचालित पानी टंकी लगाने का आग्रह प्रशासन से किया गया है।

विकास से अब तक अछूता रहा यह क्षेत्र

​पारसनाथ की तराई में बसा यह इलाका लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा। पूर्व में जब यहां सीआरपीएफ (CRPF) कैंप की स्थापना की जा रही थी, तब काफी विरोध और तनाव उत्पन्न हुआ था। इन विषम परिस्थितियों का असर दशकों तक यहाँ के बुनियादी ढाँचे पर पड़ा, जिसके चलते आज तक कोई जनप्रतिनिधि यहाँ तक नहीं पहुँच सका था।

​विधायक जयराम महतो ने सामाजिक संस्थाओं से भी इस दूरस्थ क्षेत्र में जाकर सहयोग करने की अपील की थी, जिस पर कई गैर-सरकारी संगठनों और समाजसेवियों ने आगे आकर मदद का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने दोहराया कि अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ही उनका मुख्य संकल्प है।

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