हजारीबाग में 'सुलह से समाधान' की नई पहल, मेडिएशन फॉर नेशन 2.0 के तहत 2500 मुकदमों के निपटारे का लक्ष्य, 23 मामलों में मिली ऐतिहासिक सफलता
हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर हजारीबाग कोर्ट परिसर स्थित न्याय सदन में एक बड़ी न्यायिक पहल की शुरुआत हुई है। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के कुशल मार्गदर्शन में चल रहे विशेष अभियान 'मेडिएशन फॉर नेशन 2.0' ने अदालती बोझ को कम करने और आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाने की दिशा में रफ्तार पकड़ ली है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस मुहिम का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जहां वर्षों से कोर्ट के चक्कर काट रहे फरियादियों को त्वरित न्याय मिल रहा है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने अभियान की सफलता साझा करते हुए बताया कि अब तक कुल 23 पुराने और जटिल मामलों का समाधान केवल आपसी सुलह के आधार पर कर लिया गया है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है, क्योंकि प्राधिकार ने जिले में लंबित लगभग 2500 ऐसे मामलों को चिन्हित किया है जिनका निपटारा मध्यस्थता के जरिए संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक मामले के सुलझने से उससे जुड़े कई अन्य छोटे-मोटे विवाद भी खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे, जिससे पक्षकारों को सालों साल कोर्ट के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और उनके धन व समय दोनों की बचत होगी।
इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित मध्यस्थों की टीम पूरी निष्ठा के साथ जुटी हुई है। न्याय सदन के मध्यस्थता केंद्र में वैवाहिक कलह, घरेलू हिंसा, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस (एनआई एक्ट), जमीन विवाद और बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जा रहा है। इसके अलावा उपभोक्ता फोरम, कर्ज और व्यावसायिक विवादों को भी इस दायरे में लाया गया है ताकि समाज में शांति व्यवस्था बनी रहे। सचिव ने आम जनों से अपील की है कि वे अपनी जिद छोड़कर इस वैकल्पिक समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बनें और लोक अदालतों व मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों का स्थायी और सौहार्दपूर्ण अंत करें।

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