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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग नेशनल लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत: एक दिन में सुलझे 73,812 मामले, ₹32 करोड़ का हुआ सेटलमेंट

हजारीबाग सिविल कोर्ट में नेशनल लोक अदालत का आयोजन, 73,812 मामलों का निष्पादन और ₹32 करोड़ से अधिक की राशि पर बनी सहमति। जानें कैसे मिला लोगों को सस्ता
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हजारीबाग नेशनल लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत: एक दिन में सुलझे 73,812 मामले, ₹32 करोड़ का हुआ सेटलमेंट

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड
हजारीबाग सिविल कोर्ट में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ करते प्रधान जिला जज रंजीत कुमार एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारी।

हजारीबाग/झारखंड: न्यायिक प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में शनिवार को हजारीबाग सिविल कोर्ट ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में आपसी सहमति और सुलह के जरिए हजारों परिवारों के वर्षों पुराने विवादों का अंत हुआ।

ऑनलाइन उद्घाटन और न्याय का बड़ा मंच

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने ऑनलाइन माध्यम से किया। इस अवसर पर हजारीबाग के प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने इस मंच की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक माध्यम है जहां न किसी की हार होती है और न किसी की जीत, बल्कि न्याय की जीत होती है।"

आंकड़ों में सफलता की कहानी

जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस लोक अदालत में रिकॉर्ड सफलता मिली है:

कुल निष्पादित मामले: 73,812

कुल समझौता राशि: ₹32,37,23,258 (32 करोड़ 37 लाख से अधिक)

प्रमुख मामले: बैंक रिकवरी (1174), बिजली विवाद (423), चेक बाउंस (153) और भू-अर्जन (597)।

6 साल बाद फिर बसा एक परिवार

इस लोक अदालत की सबसे भावुक तस्वीर तब दिखी जब कुटुंब न्यायालय के जज अनुज कुमार के प्रयासों से 6 वर्षों से अलग रह रहे एक पति-पत्नी फिर से एक साथ रहने को तैयार हुए। प्रधान जिला जज ने इस जोड़े को शुभकामनाएं दीं और उनकी 6 वर्षीय बेटी को उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया। यह मामला साबित करता है कि लोक अदालत केवल पैसों का हिसाब नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने का भी केंद्र है।

विशेषज्ञों की राय: क्यों खास है लोक अदालत?

न्यायिक पदाधिकारियों के अनुसार, लोक अदालत में मामलों का निष्पादन त्वरित होता है और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे कानूनी उलझनों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में बार संघ अध्यक्ष राजकुमार, डीएफओ मौन प्रकाश, न्यायिक पदाधिकारी जूही कुमारी और सचिव गौरव खुराना सहित कई अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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