हजारीबाग राजस्व समीक्षा बैठक में कड़े तेवर: प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने कहा- दाखिल खारिज में लापरवाही पर अंचल अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई
"सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए उपायुक्त हेमंत सती का सख्त निर्देश; परिवहन, खनन, उत्पाद और नगर निगम को अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर लक्ष्य प्राप्ति के आदेश"— प्रमंडलीय ब्यूरो
प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग
- रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): प्रमंडलीय सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग (प्रेस विज्ञप्ति संख्या: 361/10.06.2026, दिनांक: 10 जून 2026)
हजारीबाग:
हजारीबाग समाहरणालय के सभाकक्ष में जिले के विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण (Revenue Collection) से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रमंडलीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी कार्यों को गति देने के लिए राजस्व में वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वे अपनी समस्त वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य आधारित राजस्व की प्राप्ति हर हाल में सुनिश्चित करें। आयुक्त ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने नियमों, शासनादेशों और प्रक्रियाओं की जितनी बेहतर जानकारी होगी, वे उतना ही पारदर्शी और मजबूत काम कर सकेंगे।
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| "हजारीबाग में दाखिल-खारिज और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त और उपायुक्त ने अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं!" |
दाखिल-खारिज में देरी पर लगेगा सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS)
लंबित दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और अंचल अधिकारियों (CO) को चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज के मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय समय सीमा के भीतर म्यूटेशन के मामलों का निष्पादन नहीं किया गया, तो संबंधित अंचल अधिकारी के विरुद्ध सेवा अधिकार अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सरकारी और वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त रखने का उपायुक्त हेमंत सती का निर्देश
बैठक में विशेष रूप से मौजूद हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने भूमि संरक्षण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण, अनधिकृत गतिविधि या अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को चिन्हित कर त्वरित रूप से अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाएं और उसकी नियमित ऑन-फील्ड निगरानी सुनिश्चित करें।
विभिन्न तकनीकी व राजस्व विभागों की बिंदुवार समीक्षा एवं आयुक्त के कड़े निर्देश:
- परिवहन विभाग: जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को दलालों और बिचौलियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया। ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण जैसी सेवाओं को इतना सरल और सुगम बनाया जाए कि आम जनता को वेंडरों पर निर्भर न रहना पड़े। डिफॉल्टर, ओवरलोड वाहनों और अवैध बसों के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाने को कहा गया।
- उत्पाद विभाग: बिहार सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आयुक्त ने गुप्तचर तंत्र (Intelligence Network) को सक्रिय करने का आदेश दिया। अवैध शराब निर्माण, तस्करी और भट्टियों को ध्वस्त करने के लिए सघन छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
- खनन विभाग: विभिन्न नदी घाटों से हो रहे अवैध बालू उठाव और अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए। बिना वैध दस्तावेजों के खनिज ढोने वाले वाहनों के खिलाफ एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम के तहत कठोर विधिक कार्रवाई करने को कहा गया।
- वाणिज्य कर विभाग: जीएसटी (GST) का नियमित भुगतान न करने वाले ठेकेदारों और व्यवसायियों की सूची तैयार कर कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने का आदेश दिया गया।
- नगर निगम: राजस्व संग्रहण बढ़ाने के साथ-साथ हजारीबाग झील परिसर में हाई मास्ट लाइट लगाने, नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग कराने और सार्वजनिक स्थानों पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
- माप-तौल एवं मत्स्य विभाग: पेट्रोल पंपों का नियमित निरीक्षण करने और बड़े जलाशयों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अंतर्विभागीय समन्वय का निर्देश दिया गया।
भू-अर्जन और आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा
बैठक के दौरान जिले में चल रही बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं जैसे एनटीपीसी (NTPC), विभिन्न कोल कंपनियों और एनएचएआई (NHAI) से जुड़े भू-अर्जन मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इसके तहत म्यूटेशन, एलपीसी (LPC), लीज, जीएम जेजे भूमि, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, पैक्स भवनों के स्थानांतरण, ट्रांसमिशन लाइन तथा वनाधिकार अधिनियम (FRA) से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु भवन प्रमंडल के सहायक अभियंता को भवन मूल्यांकन कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
इस उच्च स्तरीय प्रमंडलीय बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे:
- हेमंत सती (उपायुक्त, हजारीबाग)
- रिया सिंह (उपविकास आयुक्त, हजारीबाग)
- ओमप्रकाश गुप्ता (नगर आयुक्त, हजारीबाग)
- महेंद्र छोटन उरांव (अपर समाहर्ता, हजारीबाग)
- जोहन टुडू (अनुमंडल पदाधिकारी, बरही)
- प्रमंडल के सभी अंचल अधिकारी (CO), विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कोल कंपनियों के आधिकारिक प्रतिनिधि।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व प्रशासनिक ज्ञान / Revenue & RTPS Framework)
📌 जानिए क्या है सेवा अधिकार अधिनियम (Right to Service Act) और म्यूटेशन की विधिक समय सीमा?
- सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS): इस कानून के तहत आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं (जैसे जाति, आवासीय प्रमाण-पत्र या दाखिल-खारिज) एक निश्चित समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस विधिक कारण के फाइल रोकता है, तो उस पर वित्तीय जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
- MMDR अधिनियम: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत बिना वैध चालान या लीज के खनिजों (जैसे बालू, कोयला, पत्थर) का उत्खनन और परिवहन गैर-कानूनी है, जिसमें वाहन जब्ती और गैर-जमानती प्राथमिकी (FIR) का प्रावधान है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: जनहित के लिए कड़े प्रशासनिक फैसले और भ्रष्टाचार पर चोट जरूरी (Editorial)
सिस्टम की सुस्ती पर आयुक्त के कड़े तेवर स्वागत योग्य, पर जमीनी स्तर पर अंचल कार्यालयों की कार्यशैली बदलना बड़ी चुनौती
उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त विजय कुमार गुप्ता द्वारा दाखिल-खारिज में देरी पर अंचल अधिकारियों (CO) के खिलाफ सीधे सेवा अधिकार अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी देना एक बेहद जरूरी और साहसिक कदम है। झारखंड में अंचल कार्यालयों (अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों) की कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता हमेशा त्रस्त रहती है। जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए गरीबों को महीनों अंचल के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी तरह, उपायुक्त हेमंत सती का सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का निर्देश भी हजारीबाग की शहरी और ग्रामीण व्यवस्था को बचाने के लिए आवश्यक है। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि ये निर्देश केवल फाइलों तक सीमित न रहें; जब तक दो-चार दोषी अधिकारियों पर असल में दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बिचौलियों का तंत्र और अंचल कार्यालयों की सुस्ती खत्म होना नामुमकिन है।

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