झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की आपात बैठक में हंगामा: परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध बताने पर जताया कड़ा विरोध
"चुनाव आयोग के फैसले से लोकतंत्र शर्मसार; राज्यसभा प्रत्याशी प्रणब झा, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप सहित वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र पर साधा निशाना"— विशेष रिपोर्ट
राजनीतिक ब्यूरो, रांची
- रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी / विधानसभा ब्यूरो (दिनांक: 10 जून 2026)
रांची:
झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। झारखंड विधानसभा परिसर में कांग्रेस पार्टी की ओर से एक भव्य और अति महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें आगामी चुनाव की रणनीतियों और हालिया घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग द्वारा परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को कथित तौर पर गलत तरीके से वैध (Valid) घोषित किए जाने के खिलाफ रणनीति तैयार करना और इस विधिक प्रक्रिया पर सामूहिक विचार-विमर्श करना था। बैठक में उपस्थित कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेताओं ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया।
![]() |
| "झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले रांची में सियासी भूचाल आ गया है! परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस ने सीधे चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है!" |
लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति: कांग्रेस नेतृत्व
बैठक के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने एक सुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार नियमों को ताक पर रखकर परिमल नाथवानी के नामांकन को हरी झंडी दी गई है, वह पूरी तरह असंवैधानिक है। इस तरह की हरकतों से न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता खत्म होती है, बल्कि संपूर्ण लोकतंत्र शर्मसार होता है। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के लिए एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति करार दिया।
बैठक में महागठबंधन और कांग्रेस के ये दिग्गज रहे मौजूद
राज्यसभा चुनाव की इस रणनीति बैठक में कांग्रेस और सत्ताधारी गठबंधन के कई कद्दावर चेहरे शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता उपस्थित थे:
- प्रणब झा (कांग्रेस के आधिकारिक राज्यसभा प्रत्याशी)
- दीपिका पांडे सिंह (कैबिनेट मंत्री, झारखंड सरकार)
- राजेश कच्छप (कांग्रेस विधायक दल के उपनेता)
- राजेश ठाकुर (कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
- अनुप सिंह (विधायक, बेरमो)
- विक्सल कोंगारी (विधायक, कोलेबिरा)
- रियाज अहमद (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)
बैठक में इन सभी नेताओं के अलावा कई अन्य विधायकों और पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव की वोटिंग रणनीति, विधायकों की एकजुटता और राज्य के कई अन्य ज्वलंत राजनीतिक विषयों पर भी घंटों गहन मंथन किया गया।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( विधिक व चुनावी ज्ञान / Rajya Sabha Election Framework)
📌 जानिए कैसे होता है राज्यसभा चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) का नियम?
- नामांकन की जांच (Scrutiny of Nomination): लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को यह शक्ति प्राप्त है कि वह उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच करे। यदि प्रस्तावक के हस्ताक्षर, शपथ पत्र (Affidavit) में विसंगति या लाभ के पद (Office of Profit) से जुड़ा कोई गंभीर मामला पाया जाता है, तो नामांकन रद्द किया जा सकता है।
- अदालती चुनौती: यदि कोई राजनीतिक दल या प्रत्याशी चुनाव आयोग या रिटर्निंग ऑफिसर के किसी फैसले को गलत मानता है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) में 'चुनाव याचिका' (Election Petition) दायर कर उस फैसले को विधिक चुनौती दे सकता है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: राज्यसभा की जंग और झारखंड की दिलचस्प होती सियासत (Editorial)
नामांकन विवाद से कड़ा हुआ राज्यसभा का मुकाबला; साख बचाने की लड़ाई में उतरा सत्तारूढ़ गठबंधन
झारखंड से राज्यसभा की सीटों के लिए होने वाला यह मुकाबला अब सिर्फ मतों की गणित तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े कानूनी और नैतिक युद्ध में बदल चुका है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब झा के समर्थन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और उपनेता राजेश कच्छप जैसे दिग्गजों का एक मंच पर आना यह दिखाता है कि पार्टी परिमल नाथवानी के मुद्दे पर बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं है। चुनाव आयोग के फैसले को 'लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला' बताना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में यह विवाद झारखंड विधानसभा से लेकर कोर्ट के कमरों तक गूंजेगा। जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन के लिए यह चुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सरेन और कल्पना मुर्मू सोरेन के नेतृत्व की भी बड़ी परीक्षा है, जहां उन्हें अपने विधायकों को क्रास वोटिंग से बचाते हुए प्रणब झा की जीत सुनिश्चित करनी होगी।

No comments
Post a Comment