प्रशासनिक क्रूरता की हद: कई वर्षों से स्कूल के 2 कमरों में कैद है 13 दलितों का कुनबा, बीडीओ साहब कब खुलेगी आपकी आंख?
Hazaribagh/Daru: झारखंड में प्रशासनिक विरोधाभास और क्रूरता का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसे देखकर किसी का भी खून खौल उठेगा! एक तरफ सूबे की राजधानी रांची में बैठे आला हुक्मरान फाइलों पर दनादन हस्ताक्षर कर बड़े-बड़े विधिक पदों पर वीवीआईपी नियुक्तियां कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी धरातल पर समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े दलितों को सिर छुपाने के लिए एक अदद छत तक मयसर नहीं है।
झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 10 जून 2026 को राजपत्र अधिसूचना (का० 3761) जारी कर अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक को राज्य का नया सूचना आयुक्त नियुक्त कर दिया है। लेकिन क्या इन आलीशान दफ्तरों में बैठने वाले अफसरों और सरकार को हजारीबाग के दारू प्रखंड अंतर्गत ईरगा पंचायत से आई यह चीख सुनाई देगी?
यहाँ खैरका निवासी दलित समाज के दो सगे भाई— अर्जुन राम (7 सदस्यों का परिवार) और रामस्वरूप राम (6 सदस्यों का परिवार) पिता स्वर्गीय जानकी राम, पिछले कई वर्षों से अपनी बेटियों, बहुओं और बच्चों सहित कुल 13 सदस्यों के साथ 'दारू बालक मध्य विद्यालय' के दो कमरों में नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं! अर्जुन राम का घर टूटकर गिर गया था, जिसके बाद वे पूरी तरह बेघर हो गए। जब यह पीड़ित परिवार मुखिया अनीता देवी, दारू बीडीओ हारून रशीद और सीओ के पास गया, तो इन अधिकारियों ने इन्हें 'अबुआ आवास' या 'प्रधानमंत्री आवास' देने की जगह चालू स्कूल में ठूस दिया! शिक्षकों के अनुसार, इससे वर्ग आठवां (Class 8) के बच्चों की पढ़ाई भी पूरी तरह ठप हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, दारू प्रखंड में भ्रष्टाचार का खुला खेल चल रहा है, जहां पक्के मकान वाले रसूखदारों को 'अबुआ आवास' दनादन आवंटित कर दिए गए, लेकिन इस भूमिहीन दलित परिवार को वर्षों से केवल खोखला 'लॉलीपॉप' थमाया जा रहा है। जब 'न्यूज़ प्रहरी' और सहयोगी पत्रकारों ने दारू बीडीओ हारून रशीद से इस पर जवाब नवम्बर 2025 में मांगा था, तो उन्होंने डर के मारे अपना मोबाइल ही स्विच ऑफ कर लिया था।
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