झारखंड सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए लागू की विशेष सुरक्षा और आर्थिक सहायता योजनाएं: विदेशों और अन्य राज्यों में कार्यरत मजदूरों को पंजीकरण कराने की अपील
"ठेकेदारों के माध्यम से जाने वाले श्रमिकों को पहले दिन से मिलेगी मजदूरी और विस्थापन भत्ता; दुर्घटना में मृत्यु पर पांच लाख रुपये तक की मिलेगी एकमुश्त सहायता राशि"— श्रम विभाग
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (PRD), समाहरणालय भवन, हजारीबाग
हजारीबाग:
झारखंड सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग द्वारा राज्य के प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके आर्थिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसी सिलसिले में हजारीबाग जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा प्रेस विज्ञप्ति संख्या 359/09.06.2026 जारी कर दूसरे राज्यों अथवा विदेशों में रोजगार के लिए जाने वाले सभी श्रमिकों से अनिवार्य रूप से सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील की गई है, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति या आपातकाल में उन्हें राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर सीधे मिल सके।
विस्थापन भत्ता और पहले दिन से मजदूरी भुगतान का विधिक प्रावधान
विभाग द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई श्रमिक किसी ठेकेदार, संवेदक या कतिपय प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से दूसरे राज्य में काम करने के लिए जाता है, तो उसे कार्यस्थल पर पहुंचने और कार्य पर जाने के पहले दिन से ही नियमानुसार मजदूरी देय होगी। इसके साथ ही, प्रवासी मजदूरों को नए स्थान पर स्थापित होने के लिए विस्थापन भत्ता के रूप में उनके आधे महीने की मजदूरी के बराबर की नकद राशि संबंधित संवेदक या एजेंसी द्वारा अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों के आने-जाने का पूरा यात्रा किराया और यात्रा अवधि के दौरान की मजदूरी का भुगतान भी नियमानुसार सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है।
श्रमाधान पोर्टल और ऐप पर पंजीकरण की है बेहद सरल सुविधा
अन्य राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों की ट्रैकिंग और सुरक्षा के लिए सरकार ने डिजिटल माध्यमों को सशक्त किया है। श्रमिक स्वयं श्रमाधान पोर्टल (Shramadhan Portal), प्रवासी झारखंड ऐप (Pravasi Jharkhand App) अथवा अपने निकटतम प्रज्ञा केंद्र (सीएससी) के माध्यम से बेहद आसानी से अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इस पंजीकरण के पूरा होने के बाद ही श्रमिकों को राज्य सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ प्रदान किया जाता है।
दुर्घटना, आपदा या असमय मृत्यु पर आश्रितों को मिलेगी बड़ी आर्थिक सहायता
पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार ने संकट की घड़ी में आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए विशेष कोष का गठन किया है:
- दुर्घटना एवं पूर्ण अशक्तता सहायता: कार्य के दौरान किसी दुर्घटना में मृत्यु होने या स्थायी पूर्ण अशक्तता (अपंगता) की स्थिति में लाभुक श्रमिक के आश्रितों को दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, दुर्घटना में अंग-भंग या अन्य शारीरिक क्षति होने पर भी निर्धारित नियमावली के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है।
- पार्थिव शरीर को गृह राज्य लाना: यदि किसी श्रमिक की दूसरे राज्य में दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के कारण असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके गृह राज्य और पैतृक गांव तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था और खर्च सरकार वहन करती है।
- मुख्यमंत्री झारखंड प्रवासी श्रमिक दुर्घटना कोष: इस विशेष कोष के अंतर्गत, देश के किसी भी कोने में दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा का शिकार होने वाले मृत या गंभीर रूप से घायल प्रवासी श्रमिकों को त्वरित सहायता देने और उन्हें घर वापस लाने के लिए अग्रिम सहायता राशि (एडवांस फंड) उपलब्ध कराने का सीधा प्रावधान है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना: विदेश में जाकर रोजगार करने वाले झारखंड के श्रमिकों के लिए सरकार 'मुख्यमंत्री झारखंड अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना' संचालित कर रही है। इसके तहत यदि किसी श्रमिक की विदेश में असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिजनों और आश्रितों को संकट से उबारने के लिए पांच लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है।
श्रम विभाग ने राज्य के सभी कामकाजी भाई-बहनों से पुरजोर अपील की है कि वे आजीविका के लिए राज्य की सीमा से बाहर कदम रखने से पहले अपना सरकारी पंजीकरण अवश्य सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार की विस्तृत जानकारी, शिकायत या आपातकालीन सहायता के लिए श्रमिक जिला श्रम कार्यालय, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के कार्यालय अथवा विभाग के टोल फ्री नंबर 18003456526 पर सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इसके साथ ही, राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष (Control Room) के विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों पर भी 24 घंटे सहायता प्राप्त की जा सकती है।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (Inter-State Migrant Workmen Act & Welfare Rules)
📌 जानिए क्या है अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम और आपके कानूनी अधिकार?
- अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 (ISMW Act): यह एक केंद्रीय कानून है जो उन श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है जिन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य में काम के लिए ले जाया जाता है। इस कानून के तहत 5 या अधिक प्रवासी श्रमिकों को नियोजित करने वाले हर ठेकेदार और नियोक्ता के लिए लाइसेंस लेना और सरकार के पास प्रत्येक मजदूर का पूरा ब्यौरा दर्ज कराना विधिक रूप से अनिवार्य है।
- विस्थापन भत्ते का कानूनी आधार: अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, प्रत्येक प्रवासी श्रमिक को रोजगार की कमान संभालने के समय ही संवेदक द्वारा विस्थापन भत्ता (Displacement Allowance) दिया जाना अनिवार्य है, जो न्यूनतम मजदूरी के 50% या उससे अधिक होता है। यह राशि गैर-वापसी योग्य (Non-Refundable) होती है, यानी इसे मजदूर के वेतन से काटा नहीं जा सकता।
- समान कार्य के लिए समान वेतन: इस कानून के तहत प्रवासी श्रमिकों को उसी संस्थान या उद्योग में स्थानीय श्रमिकों के बराबर ही मजदूरी, कार्य के घंटे और सुविधाएं पाने का वैधानिक अधिकार है। चिकित्सा सुविधाएं, उपयुक्त आवास और कार्यस्थल पर लैंगिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी नियोक्ता की सीधी कानूनी जिम्मेदारी है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: पलायन का दर्द और सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की चुनौती (Editorial)
पंजीकरण की अपील सराहनीय, लेकिन सुदूर गांवों में जागरूकता और नियंत्रण कक्ष की सक्रियता सबसे बड़ी कसौटी
झारखंड जैसे श्रम-बहुल राज्य में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर श्रम विभाग द्वारा जारी की गई यह नियमावली और योजनाएं कागजी तौर पर अत्यंत स्वागत योग्य और मानवीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण हैं। विदेशों में मरने वाले श्रमिकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और देश के भीतर हादसे का शिकार होने वालों को 2 लाख रुपये की सहायता देना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। लेकिन 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि इन योजनाओं की वास्तविक सफलता केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका सीधा लाभ उन सुदूरवर्ती और ग्रामीण इलाकों के मजदूरों तक पहुंचना चाहिए जो अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे होने के कारण डिजिटल पंजीकरण की जटिलताओं से दूर हैं।
अक्सर देखा जाता है कि हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो जैसे जिलों से हजारों मजदूर बिना किसी पंजीकरण के दलालों के माध्यम से लेह, लद्दाख, चेन्नई या खाड़ी देशों में चले जाते हैं। जब वहां उनके साथ कोई हादसा होता है या बंधक बनाया जाता है, तब प्रशासन को उनकी सुध आती है। सरकार को चाहिए कि वह पंचायतों के माध्यम से मुखिया और रोजगार सेवकों को यह जिम्मेदारी सौंपे कि गांव से बाहर जाने वाले हर पैर का रिकॉर्ड पंचायत भवन में दर्ज हो। साथ ही, विभाग के टोल फ्री नंबर 18003456526 की कार्यप्रणाली को इतना दुरुस्त करना होगा कि सुदूर लेह की पहाड़ियों में फंसा हुआ कोई श्रमिक जब फोन करे, तो उसे तत्काल प्रशासनिक रेस्क्यू मिल सके। केवल तभी 'श्रमाधान' सचमुच में समाधान बन पाएगा।

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