हजारीबाग उत्पाद विभाग की तड़के बड़ी कार्रवाई: सिंदूर चौक से कटकमदाग तक फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़ी गई एर्टिगा कार, 55 कार्टन अवैध विदेशी शराब जब्त
"उपायुक्त हेमंत सती के आदेश पर सुबह साढ़े चार बजे कोर्रा पुलिस प्रभाग में चेकिंग के दौरान भाग रहा तस्कर सालगांव हाई स्कूल के पास गाड़ी छोड़ फरार, 475 लीटर से अधिक अवैध शराब बरामद"— उत्पाद टीम
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
समाचार स्रोत (Source): सहायक आयुक्त उत्पाद कार्यालय सह कटकमदाग एवं कोर्रा थाना प्रभाग, हजारीबाग
हजारीबाग: हजारीबाग जिले में अवैध और गैर-कानूनी शराब के सिंडिकेट, अंतर-जिला परिवहन और तस्करी के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की मुस्तैदी लगातार रंग ला रही है। हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती द्वारा अवैध शराब के कारोबार व संचय पर पूर्णतः अंकुश लगाने के लिए जारी किए गए कड़े छापेमारी आदेश के आलोक में उत्पाद विभाग को एक और बड़ी और बेहद रोमांचक सफलता हाथ लगी है। सहायक आयुक्त उत्पाद, हजारीबाग के कुशल निर्देशन में उत्पाद विभाग की विशेष टीम ने मंगलवार (09 जून 2026) की सुबह तड़के फिल्मी अंदाज में एक संदिग्ध कार का पीछा करते हुए भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब (IMFL) की खेप को जब्त किया है।
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| 📝 कार्रवाई का पूरा ब्योरा: लग्जरी गाड़ी के भीतर छिपाकर ले जाए जा रहे थे 55 कार्टन; उत्पाद टीम ने जॉर्ज विलियम ब्रांड के 180ml के पाउच और रॉयल ग्रीन की बोतलें कीं जब्त। |
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, उत्पाद विभाग की खुफिया विंग को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि सुबह के वक्त एक लग्जरी कार के जरिए विदेशी शराब की बड़ी खेप खपाने के लिए हजारीबाग शहर के रास्ते ले जाई जा रही है। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सुबह करीब 4:30 बजे कोर्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंदूर चौक के समीप उत्पाद विभाग द्वारा सघन वाहन जांच का विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया।
सिंदूर चौक पर बैरिकेडिंग तोड़कर भागी कार, पुलिस ने किया पीछा
वाहन जांच के दौरान सिंदूर चौक पर पुलिस टीम को एक सफेद रंग की मारुति सुजुकी एर्टिगा कार (लग्जरी वाहन) आती हुई दिखाई दी। संदेह के आधार पर जब उत्पाद विभाग के अधिकारियों और सशस्त्र जवानों ने उसे रुकने का इशारा किया, तो वाहन चालक ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी और बैरिकेडिंग को छकाते हुए तेजी से कटकमदाग मार्ग की ओर भाग निकला। उत्पाद विभाग की टीम ने बिना एक पल गंवाए अपनी गाड़ियों से तस्कर का पीछा (High-Speed Chase) करना शुरू कर दिया।
खुद को पुलिस से चारों तरफ से घिरता देख और उत्पाद विभाग की गाड़ियों को पीछे लगा पाकर तस्कर वाहन को लेकर कटकमदाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सालगांव की ओर मुड़ गया। सालगांव स्थित स्थानीय हाई स्कूल के समीप पहुंचते ही तस्कर ने कार को सड़क किनारे खड़ा किया और अंधेरे व झाड़ियों का फायदा उठाकर गिरफ्तारी से बचकर मौके से भागने में सफल रहा।
55 कार्टन में भरी थी 475 लीटर विदेशी शराब, गाड़ी और माल विधिवत जब्त
तस्कर के फरार होने के बाद जब उत्पाद विभाग की टीम ने सालगांव हाई स्कूल के पास खड़ी उक्त सफेद एर्टिगा कार की घेराबंदी कर कानूनन और विधिवत सघन तलाशी ली, तो गाड़ी के भीतर का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए। कार की पिछली सीटों को हटाकर उसमें भारी मात्रा में शराब के कार्टन लादे गए थे। गिनती करने पर कार के भीतर से कुल 55 कार्टन अवैध विदेशी शराब बरामद की गई।
इन कार्टनों को खोलने पर लंदन ब्रेवरेज द्वारा निर्मित 'जॉर्ज विलियम' (George William) ब्रांड की 180 एमएल (ml) की प्लास्टिक पैकिंग वाली कुल 475.2 लीटर अवैध विदेशी शराब पाई गई। इसके साथ ही कार से 'रॉयल ग्रीन' (Royal Green) ब्रांड की 375 एमएल की 6 पीस विदेशी शराब भी बरामद की गई। उत्पाद टीम ने बरामद शराब की पूरी खेप और तस्करी में प्रयुक्त मारुति सुजुकी एर्टिगा कार को घटना स्थल से ही विधिवत तरीके से जब्त कर लिया है।
उत्पाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि गाड़ी के चेसिस नंबर, इंजन नंबर और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के जरिए वाहन के असली मालिक और इस तस्करी के पीछे शामिल मुख्य सिंडिकेट के सरगनाओं की पहचान की जा रही है। फरार चालक और संलिप्त तस्करों के खिलाफ झारखंड उत्पाद एवं आबकारी अधिनियम की विभिन्न सुसंगत और कड़े गैर-जमानती प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस साहसिक और सफल छापेमारी दल में मुख्य रूप से उत्पाद अवर निरीक्षक भुवनेश्वर नायक, उत्पाद आरक्षी अनूप कुमार सिंह और सशस्त्र गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) के जवान शामिल थे।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (Excise Laws on Illegal Inter-State Smuggling)
📌 हाईवे चेस और वाहनों के जरिए शराब की तस्करी: जानिए क्या हैं कड़े कानूनी प्रावधान?
झारखंड उत्पाद अधिनियम की धारा 47(A) और 52: किसी भी वाहन में बिना परमिट या बिना वैध आबकारी पास के भारी मात्रा में विदेशी या देसी शराब का परिवहन करना इस धारा के तहत गंभीर अपराध है। इसमें शराब की जब्ती के साथ-साथ तस्करी में प्रयुक्त वाहन (चाहे वह किसी का भी हो) को राज्य सरकार के पक्ष में पूरी तरह राजसात (Confiscate/जब्त) करने का कड़ा नियम है।
वाहन जांच और पीछा करने का नियम: यदि कोई संदिग्ध वाहन पुलिस या आबकारी विभाग के रोकने के इशारे के बावजूद बैरिकेड तोड़कर भागता है, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आत्मरक्षा और अपराध की रोकथाम के लिए उस वाहन का पीछा करने, टायरों पर प्रहार करने या कटकमदाग जैसी नाकेबंदी करने का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त है।
ब्रांड और पैकेजिंग का नियम: बिहार जैसे शुष्क (Dry) राज्यों या स्थानीय ग्रामीण इलाकों में खपाने के लिए अक्सर दूसरे राज्यों (जैसे अरुणाचल या चंडीगढ़) की बनी फॉर-सेल-ओनली शराब की तस्करी की जाती है। ऐसी शराब की बरामदगी पर आबकारी विभाग सीधे तौर पर गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करता है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: सुबह की मुस्तैदी ने नाकाम किया शराब माफिया का बड़ा सिंडिकेट (Editorial)
सिंदूर चौक से सालगांव तक उत्पाद विभाग का एक्शन: एर्टिगा कार का पकड़ा जाना पुलिस की चौकसी का प्रमाण, पर तस्कर का भागना चिंताजनक सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय हजारीबाग के इनपुट और उत्पाद विभाग की इस ताजा कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि शराब माफिया अब पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए लग्जरी और पारिवारिक गाड़ियों (जैसे मारुति एर्टिगा) का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। सुबह 4:30 बजे का वक्त वह समय होता है जब सड़कों पर पुलिस की गश्त आमतौर पर ढीली होती है, और माफिया इसी का फायदा उठाते हैं। उत्पाद अवर निरीक्षक भुवनेश्वर नायक और उनकी टीम निश्चित रूप से बधाई की पात्र है कि उन्होंने न केवल तस्कर की गाड़ी को रोकने का प्रयास किया बल्कि बैरिकेड तोड़कर भागने पर सालगांव हाई स्कूल तक उसका पीछा किया। 475 लीटर से अधिक जॉर्ज विलियम और रॉयल ग्रीन ब्रांड की विदेशी शराब की यह खेप यह साफ इशारा करती है कि हजारीबाग का इस्तेमाल एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में किया जा रहा था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में तस्कर का गाड़ी छोड़कर भाग जाना जिला पुलिस की ग्राउंड नाकेबंदी पर एक सवाल भी खड़ा करता है। यदि कोर्रा पुलिस तुरंत कटकमदाग पुलिस को वायरलेस संदेश भेजकर आगे से घेराबंदी करवाती, तो शायद तस्कर सालगांव में भागने के बजाय सलाखों के पीछे होता। बहरहाल, अब गेंद जिला पुलिस और आबकारी विभाग के पाले में है कि वे कार के नंबर और कागजात खंगालकर उस 'व्हाइट कॉलर' माफिया तक पहुंचे जिसके इशारे पर सुबह के अंधेरे में मौत और नशे का यह सामान हजारीबाग की सड़कों पर दौड़ रहा था।

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