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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग प्रशासन का सख्त रुख: ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का हुआ संयुक्त निरीक्षण, NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों को मिले कड़े निर्देश

हजारीबाग: जिला प्रशासन ने ब्लैक स्पॉट और यूपी मोड़ का किया निरीक्षण। NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों को मिले सख्त निर्देश। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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हजारीबाग प्रशासन का सख्त रुख: ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का हुआ संयुक्त निरीक्षण, NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों को मिले कड़े निर्देश

"तेज गति और अंधा मोड़ बन रहे हैं मौत का सबब; मासीपिढ़ी चौक से यूपी मोड़ तक सुधारात्मक कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन की विशेष टीम सक्रिय"— जिला सड़क सुरक्षा प्रभाग

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला जनसंपर्क कार्यालय एवं जिला सड़क सुरक्षा टीम, हजारीबाग

हजारीबाग:

जिले में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए और आम जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त, हजारीबाग के निर्देश पर जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा टीम ने आज एक सघन संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य फोकस जिले के चिह्नित 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots) और उन क्षेत्रों पर था, जहां दुर्घटनाओं की संभावना सबसे अधिक है। जिला परिवहन पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (यातायात), मोटर यान निरीक्षक (MVI) तथा जिला सड़क सुरक्षा टीम के सदस्यों ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का भौतिक जायजा लिया।

📝 क्यों बढ़ रहे हैं हादसे? 1. वाहनों की ओवर-स्पीडिंग (मासीपिढ़ी/डेमोटांड), 2. तीव्र ढलान और अंधा मोड़ (यूपी मोड़)। अब प्रशासन उठाएगा सुधारात्मक कदम।

निरीक्षण में उजागर हुई खतरे की मुख्य वजहें

​संयुक्त टीम द्वारा की गई गहन पड़ताल में दुर्घटनाओं के पीछे के ठोस कारण सामने आए हैं, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दर्शाते हैं:

  • ओवर-स्पीडिंग: मासीपिढ़ी चौक, डेमोटांड और मोरंगी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वाहनों की बेलगाम और अत्यधिक तेज गति (Over-speeding) लगातार हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रही है।
  • अंधा मोड़ और तीव्र ढलान: 'यूपी मोड़' (UP Mod) को सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र पाया गया है, जहां सड़क की तीव्र ढलान और 'ब्लाइंड स्पॉट' (Blind Spot) होने के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो रहे हैं।

NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

​जिला प्रशासन ने इन खतरनाक स्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

  • NHAI रांची को अल्टीमेटम: संयुक्त टीम ने एनएचएआई (NHAI) रांची को स्पष्ट निर्देश दिया है कि दुर्घटना संभावित सभी स्थलों और मोड़ों पर तुरंत आवश्यक साइनबोर्ड, रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर्स और गति सीमा संकेतक (Speed Limit Indicators) लगाना सुनिश्चित किया जाए।
  • पेट्रोल पंप संचालकों पर नकेल: मोरंगी स्थित पेट्रोल पंप संचालक को भी प्रशासन ने चेतावनी देते हुए आदेश दिया है कि पंप के समीप और पहुंच मार्ग (Approach Road) पर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो, ताकि मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले वाहनों को कोई व्यवधान या दुर्घटना का खतरा न हो।

प्रशासन की अपील: गति सीमा का रखें ध्यान, सड़क सुरक्षा है प्राथमिकता

​जिला प्रशासन ने आम जनता से भी सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। विशेषकर खतरनाक मोड़ों पर सतर्कता बरतने और निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाने का आग्रह किया गया है। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों और सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने वाली एजेंसियों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: क्या सड़क सुरक्षा के कागजी निर्देशों से कम होंगे हादसे? (Editorial)

सिर्फ साइनबोर्ड और रंबल स्ट्रिप ही नहीं, बल्कि चालकों में 'सड़क शिष्टाचार' की भी है भारी कमी

हजारीबाग प्रशासन का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन सड़क सुरक्षा सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। मासीपिढ़ी, डेमोटांड और यूपी मोड़ जैसे क्षेत्रों में बार-बार दुर्घटनाएं होना इस बात का प्रमाण है कि हमारी सड़क इंजीनियरिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट के बीच का समन्वय कमजोर है। NHAI को रंबल स्ट्रिप और साइनबोर्ड लगाने का निर्देश देना पहला कदम है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन नियमों का पालन करवाने की है। एनएच पर चलने वाले भारी वाहनों और तेज रफ्तार चारपहिया गाड़ियों पर नियंत्रण के लिए नियमित पेट्रोलिंग और सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य है। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि जब तक पेट्रोल पंप संचालकों और एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और चालकों में यातायात अनुशासन नहीं आएगा, तब तक ब्लैक स्पॉट कम करना एक कठिन चुनौती बनी रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह भविष्य में इन सुधारात्मक कार्यों का 'ऑडिट' भी करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी निर्देश केवल फाइलों तक सीमित नहीं हैं।

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