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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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बेरमो में मजदूरों के हक की बड़ी जीत: एशिन एनर्जी कंपनी में वेतन कटौती और दुर्व्यवहार के खिलाफ झुका प्रबंधन, विधायक जयराम महतो ने कराया समझौता

 

बेरमो में मजदूरों के हक की बड़ी जीत: एशिन एनर्जी कंपनी में वेतन कटौती और दुर्व्यवहार के खिलाफ झुका प्रबंधन, विधायक जयराम महतो ने कराया समझौता

"डुमरी विधायक ने मजदूरों की शिकायत पर कंपनी प्रबंधन को दी कड़ी चेतावनी; कहा- स्थानीय लोगों के अधिकार और मेहनत की कमाई से नहीं होगा कोई समझौता"— विशेष रिपोर्ट

प्रशासनिक एवं राजनीतिक ब्यूरो, बेरमो (बोकारो)

  • रिपोर्टर: क्षेत्र संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): आधिकारिक प्रेस वक्तव्य, विधायक कार्यालय (दिनांक: 12 जून 2026)

बेरमो:

झारखंड के बेरमो विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत संचालित औद्योगिक इकाई 'एशिन एनर्जी कंपनी' में स्थानीय मजदूरों के शोषण और दुर्व्यवहार के खिलाफ डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने एक बड़ा मोर्चा खोला है। कंपनी में कार्यरत स्थानीय मजदूरों द्वारा बड़े पैमाने पर वेतन कटौती किए जाने और प्रबंधन द्वारा उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की गंभीर शिकायतें विधायक को प्राप्त हुई थीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक ने तत्काल हस्तक्षेप किया और कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए मजदूरों की मांगों पर त्वरित विधिक व व्यावहारिक समाधान निकालने को विवश कर दिया।

बेरमो में जयराम महतो का बड़ा एक्शन! एशिन एनर्जी कंपनी के अधिकारी झुके, मजदूरों की हुई बड़ी जीत।"

विधायक की कड़ी चेतावनी: सम्मान और मेहनत की कमाई सर्वोपरि

​मजदूरों की समस्याओं को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनने के बाद विधायक जयराम कुमार महतो ने सीधे कंपनी प्रबंधन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कंपनी के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि बेरमो और झारखंड की धरती पर स्थानीय मजदूरों के सम्मान, उनके विधिक अधिकारों और उनकी खून-पसीने की मेहनत की कमाई से किसी भी प्रकार का समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि कंपनियों को स्थानीय लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें गरिमापूर्ण कार्य वातावरण भी देना होगा।

  • बेरमो में जयराम महतो का बड़ा एक्शन! एशिन एनर्जी कंपनी के अधिकारी झुके, मजदूरों की हुई बड़ी जीत।" 
संवाद का असर: झुका कंपनी प्रबंधन, विवाद का हुआ स्थायी समाधान

​इस आक्रामक और सकारात्मक पहल के बाद एशिन एनर्जी कंपनी प्रबंधन बैकफुट पर आ गया। विधायक के सीधे हस्तक्षेप और कड़े रुख के परिणामस्वरूप मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच एक मेज पर बैठकर विस्तृत वार्ता हुई। सकारात्मक संवाद और विधिक तर्कों के बाद दोनों पक्षों के बीच सभी बिंदुओं पर पूर्ण सहमति बन गई। प्रबंधन ने मजदूरों के वेतन कटौती की समीक्षा करने, बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न होने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद इस गंभीर औद्योगिक विवाद का पूरी तरह पटाक्षेप हो गया।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (श्रम अधिकार एवं न्यूनतम मजदूरी नियम / Labor Laws & Rights)

​📌 जानिए कंपनियों में कार्यरत मजदूरों के विधिक अधिकार और वेतन कटौती के कड़े नियम क्या हैं?

  • मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (Payment of Wages Act): इस केंद्रीय श्रम कानून के तहत कोई भी निजी या सरकारी कंपनी किसी भी कर्मचारी या मजदूर के वेतन में से बिना किसी विधिक कारण (जैसे अनधिकृत अनुपस्थिति या नुकसान) के एकतरफा कटौती नहीं कर सकती। यदि कंपनी ऐसा करती है, तो वह कानूनन अपराध है और मजदूर जिला श्रम अधीक्षक (Labor Superintendent) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • 75% स्थानीय नियोजन कानून: झारखंड सरकार के नियमानुसार राज्य में संचालित सभी निजी कंपनियों को 40,000 रुपये तक के मासिक वेतन वाले पदों पर 75 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को अनिवार्य रूप से नियोजित करना है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर मजदूरों की गरिमा और सुरक्षा तय करना औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम के तहत अनिवार्य विधिक जिम्मेदारी है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: झारखंडी मूलवासियों के श्रम का सम्मान ही औद्योगिक प्रगति की पहली शर्त (Editorial)

जयराम महतो का त्वरित एक्शन अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए नजीर, कंपनियों को छोड़नी होगी औपनिवेशिक मानसिकता

बेरमो के एशिन एनर्जी कंपनी में स्थानीय मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार और वेतन कटौती की घटना कोई नई बात नहीं है। झारखंड के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाहरी कंपनियां यहाँ के संसाधनों का दोहन तो करती हैं, लेकिन स्थानीय मजदूरों को उनका जायज हक देने में आनाकानी करती हैं। डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो द्वारा इस मामले में दिखाई गई तत्परता और कड़ा रुख यह साबित करता है कि यदि जनप्रतिनिधि मजबूत इच्छाशक्ति दिखाए, तो पूंजीपति और बड़ी कंपनियां स्थानीय युवाओं का शोषण नहीं कर सकतीं। 'न्यूज़ प्रहरी' इस सफल समझौते का स्वागत करता है, लेकिन साथ ही जिला श्रम विभाग को यह चेतावनी भी देता है कि वे केवल शिकायतों का इंतजार न करें, बल्कि ऐसी कंपनियों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर यह सुनिश्चित करें कि श्रम मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं।

और पढ़ें :झारखंड के कोयलांचल में भारी बवाल: "बिजली नहीं तो कोयला नहीं" के नारे के साथ जेएलकेएम नेता बिहारी महतो ने सीसीएल अधिकारियों को घेरा


झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की बड़ी बैठक आज: जयराम कुमार महतो ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिला प्रभारियों को किया तलब

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की बड़ी बैठक आज: जयराम कुमार महतो ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के जिला प्रभारियों को किया तलब

"बोकारो और रामगढ़ जिला पुनर्गठन कार्यक्रम की तिथि और रणनीतियों पर होगा अंतिम निर्णय; केंद्रीय समिति के निर्देश पर शाम 6 बजे बुलाई गई आवश्यक बैठक"— न्यूज़ प्रहरी विशेष

राजनीतिक ब्यूरो, बोकारो/धनबाद

  • रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): केंद्रीय कार्यालय, जेएलकेएम (पत्रांक संख्या: JLKM/CP/39/26, दिनांक: 10 जून 2026)

बोकारो:

झारखंड की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे दल 'झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा' (JLKM) के सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय समिति के निर्देशानुसार आज यानी 10 जून 2026 को शाम 06:00 बजे एक अति आवश्यक सांगठनिक बैठक आयोजित की गई है। इस हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता जेएलकेएम के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो द्वारा की जा रही है। बैठक को लेकर पार्टी के केंद्रीय कार्यालय द्वारा आधिकारिक पत्र (228685.jpg) जारी कर सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।

(228685.jpg)

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के इन 5 जिला प्रभारियों की बैठक

​सांगठनिक दृष्टिकोण से बुलाई गई इस अति आवश्यक बैठक में मुख्य रूप से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी पाँचों जिलों के प्रभारियों को अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया गया है। बैठक में प्रमंडल के सांगठनिक विस्तार, बूथ स्तर की तैयारियों और कार्यकर्ताओं के सक्रिय जुड़ाव को लेकर गहन मंथन होना है।

बोकारो और रामगढ़ जिला पुनर्गठन पर लिया जाएगा अंतिम निर्णय

​साझा किए गए आधिकारिक पत्र (228685.jpg) के अनुसार, इस आपातकालीन बैठक का मुख्य एजेंडा दो प्रमुख जिलों के संगठन से जुड़ा हुआ है:

​"बैठक का मुख्य उद्देश्य बोकारो एवं रामगढ़ जिला पुनर्गठन कार्यक्रम की तिथि, समय एवं अन्य आवश्यक तैयारियों पर विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लेना है। अतः सभी संबंधित प्रभारियों से अनुरोध है कि निर्धारित समय पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा सकें।"


​राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि बोकारो और रामगढ़ में पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल कर सकती है, जिससे नए और जुझारू कार्यकर्ताओं को कमान सौंपी जा सके।

जेएलकेएम केंद्रीय व आवासीय कार्यालय का आधिकारिक विवरण

​पार्टी द्वारा जारी लेटरहेड के अनुसार, संगठन के मुख्य प्रशासनिक केंद्रों का विवरण निम्नलिखित है:

  • केंद्रीय कार्यालय: इन्द्रपुरी कॉलोनी बधराशबेटा, पो०- सतनपुर, थाना- सेक्टर 12, जिला- बोकारो (झारखंड) - 827013
  • आवासीय कार्यालय: मानटॉड़, पो०+थाना- तोपचांची, जिला- धनबाद (झारखंड) - 828402
  • डिजिटल संपर्क: ई-मेल (tigerjairamofficial@gmail.com) एवं आधिकारिक वेबसाइट (www.jlkmparty.org)

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड ( सांगठनिक व राजनीतिक ज्ञान / Political Party Framework)

​📌 जानिए क्या होता है राजनीतिक दलों में 'जिला पुनर्गठन' का महत्व?

  • सांगठनिक पुनर्गठन (Organizational Restructuring): किसी भी राजनीतिक दल के लिए जिला पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसके तहत पुराने या निष्क्रिय पदाधिकारियों को बदलकर नए चेहरों को जिला अध्यक्ष, सचिव या कोर कमेटी में जगह दी जाती है, ताकि स्थानीय स्तर पर पार्टी विरोधी लहर या सुस्ती को खत्म किया जा सके।
  • समयबद्ध निर्णय की अनिवार्यता: आगामी चुनावों या आंदोलनों को ध्यान में रखते हुए जिला पुनर्गठन की रूपरेखा तैयार की जाती है। बोकारो और रामगढ़ जैसे कोयलांचल और औद्योगिक क्षेत्रों में सांगठनिक पकड़ मजबूत करना किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए जनाधार बढ़ाने की पहली शर्त होती है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: कोयलांचल में सांगठनिक पैठ मजबूत करने की कवायद में 'टाईगर' जयराम महतो (Editorial)

बोकारो और रामगढ़ में सांगठनिक बदलाव के संकेत; क्या नए चेहरों के भरोसे जंग फतह करेगी जेएलकेएम?

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष और डुमरी के विधायक जयराम कुमार महतो युवाओं के बीच अपनी आक्रामक और माटी से जुड़ी राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के 5 जिला प्रभारियों की यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि जयराम महतो अब सिर्फ आंदोलनों तक सीमित न रहकर पार्टी को एक कॉरपोरेट और अनुशासित सांगठनिक ढांचे में ढालना चाहते हैं। बोकारो और रामगढ़ जिलों का पुनर्गठन इस दिशा में बड़ा कदम है। इन दोनों जिलों में पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान और नए-पुराने कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य की जो कमी दिख रही थी, उसे दूर करने के लिए खुद केंद्रीय अध्यक्ष ने मोर्चा संभाला है। देखना दिलचस्प होगा कि इस बैठक के बाद जो नई कमेटियां सामने आती हैं, वे जमीनी स्तर पर पार्टी को कितना फायदा पहुंचा पाती हैं।

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हजारीबाग प्रशासन का सख्त रुख: ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का हुआ संयुक्त निरीक्षण, NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों को मिले कड़े निर्देश

 

हजारीबाग प्रशासन का सख्त रुख: ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का हुआ संयुक्त निरीक्षण, NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों को मिले कड़े निर्देश

"तेज गति और अंधा मोड़ बन रहे हैं मौत का सबब; मासीपिढ़ी चौक से यूपी मोड़ तक सुधारात्मक कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन की विशेष टीम सक्रिय"— जिला सड़क सुरक्षा प्रभाग

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): जिला जनसंपर्क कार्यालय एवं जिला सड़क सुरक्षा टीम, हजारीबाग

हजारीबाग:

जिले में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए और आम जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त, हजारीबाग के निर्देश पर जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा टीम ने आज एक सघन संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य फोकस जिले के चिह्नित 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots) और उन क्षेत्रों पर था, जहां दुर्घटनाओं की संभावना सबसे अधिक है। जिला परिवहन पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (यातायात), मोटर यान निरीक्षक (MVI) तथा जिला सड़क सुरक्षा टीम के सदस्यों ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का भौतिक जायजा लिया।

📝 क्यों बढ़ रहे हैं हादसे? 1. वाहनों की ओवर-स्पीडिंग (मासीपिढ़ी/डेमोटांड), 2. तीव्र ढलान और अंधा मोड़ (यूपी मोड़)। अब प्रशासन उठाएगा सुधारात्मक कदम।

निरीक्षण में उजागर हुई खतरे की मुख्य वजहें

​संयुक्त टीम द्वारा की गई गहन पड़ताल में दुर्घटनाओं के पीछे के ठोस कारण सामने आए हैं, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दर्शाते हैं:

  • ओवर-स्पीडिंग: मासीपिढ़ी चौक, डेमोटांड और मोरंगी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वाहनों की बेलगाम और अत्यधिक तेज गति (Over-speeding) लगातार हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रही है।
  • अंधा मोड़ और तीव्र ढलान: 'यूपी मोड़' (UP Mod) को सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र पाया गया है, जहां सड़क की तीव्र ढलान और 'ब्लाइंड स्पॉट' (Blind Spot) होने के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो रहे हैं।

NHAI और पेट्रोल पंप संचालकों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

​जिला प्रशासन ने इन खतरनाक स्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

  • NHAI रांची को अल्टीमेटम: संयुक्त टीम ने एनएचएआई (NHAI) रांची को स्पष्ट निर्देश दिया है कि दुर्घटना संभावित सभी स्थलों और मोड़ों पर तुरंत आवश्यक साइनबोर्ड, रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर्स और गति सीमा संकेतक (Speed Limit Indicators) लगाना सुनिश्चित किया जाए।
  • पेट्रोल पंप संचालकों पर नकेल: मोरंगी स्थित पेट्रोल पंप संचालक को भी प्रशासन ने चेतावनी देते हुए आदेश दिया है कि पंप के समीप और पहुंच मार्ग (Approach Road) पर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो, ताकि मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले वाहनों को कोई व्यवधान या दुर्घटना का खतरा न हो।

प्रशासन की अपील: गति सीमा का रखें ध्यान, सड़क सुरक्षा है प्राथमिकता

​जिला प्रशासन ने आम जनता से भी सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। विशेषकर खतरनाक मोड़ों पर सतर्कता बरतने और निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाने का आग्रह किया गया है। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों और सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने वाली एजेंसियों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: क्या सड़क सुरक्षा के कागजी निर्देशों से कम होंगे हादसे? (Editorial)

सिर्फ साइनबोर्ड और रंबल स्ट्रिप ही नहीं, बल्कि चालकों में 'सड़क शिष्टाचार' की भी है भारी कमी

हजारीबाग प्रशासन का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन सड़क सुरक्षा सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। मासीपिढ़ी, डेमोटांड और यूपी मोड़ जैसे क्षेत्रों में बार-बार दुर्घटनाएं होना इस बात का प्रमाण है कि हमारी सड़क इंजीनियरिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट के बीच का समन्वय कमजोर है। NHAI को रंबल स्ट्रिप और साइनबोर्ड लगाने का निर्देश देना पहला कदम है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन नियमों का पालन करवाने की है। एनएच पर चलने वाले भारी वाहनों और तेज रफ्तार चारपहिया गाड़ियों पर नियंत्रण के लिए नियमित पेट्रोलिंग और सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य है। 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि जब तक पेट्रोल पंप संचालकों और एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और चालकों में यातायात अनुशासन नहीं आएगा, तब तक ब्लैक स्पॉट कम करना एक कठिन चुनौती बनी रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह भविष्य में इन सुधारात्मक कार्यों का 'ऑडिट' भी करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी निर्देश केवल फाइलों तक सीमित नहीं हैं।

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