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Editor: Naresh Prasad Soni
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बड़कागांव थाना परिसर में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी ने जनता दरबार लगाकर की जमीन विवादों की सुनवाई: तीन मामले आए, एक का मौके पर हुआ निपटारा

बड़कागांव: सीओ और थाना प्रभारी ने जमीन विवाद निपटारे के लिए लगाया जनता दरबार। जारी हुआ शनिवार का नया रोस्टर। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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बड़कागांव थाना परिसर में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी ने जनता दरबार लगाकर की जमीन विवादों की सुनवाई: तीन मामले आए, एक का मौके पर हुआ निपटारा

"भूमि संबंधी विवादों के त्वरित निष्पादन के लिए उपायुक्त के निर्देश पर जारी हुआ रोस्टर; हर माह बड़कागांव थाना, अंचल कार्यालय और उरीमारी ओपी में लगेंगे विशेष शिविर"— प्रशासनिक प्रभाग

विशेष संवाददाता, बड़कागांव

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): अंचल कार्यालय सह थाना प्रशासनिक प्रभाग, बड़कागांव, हजारीबाग

बड़कागांव:

हजारीबाग उपायुक्त हेमंत सती के दिशा-निर्देशानुसार जिले में भूमि संबंधी विवादों के त्वरित, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण निष्पादन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में 'थाना दिवस' के अवसर पर बड़कागांव थाना परिसर में एक विशेष भूमि विवाद निपटारा जनता दरबार का आयोजन किया गया। यह जनता दरबार बड़कागांव के अंचलाधिकारी (सीओ) मनोज कुमार एवं थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित हुआ। इस शिविर में अंचल और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कुल तीन पेचीदा मामलों की गहन सुनवाई की गई, जिसमें से दोनों पक्षों की आपसी सहमति और राजस्व अभिलेखों के आधार पर एक मामले का मौके पर ही सफल निपटारा कर दिया गया।

🗓️ शनिवार का नया प्रशासनिक रोस्टर:
• प्रथम शनिवार: बड़कागांव थाना परिसर
• द्वितीय व चतुर्थ शनिवार: अंचल कार्यालय बड़कागांव

​जनता दरबार में आए मामलों की जानकारी देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि शिविर में कुल तीन भूमि विवाद के आवेदन पहुंचे थे। इसमें पहला मामला होरम शिवाडीह मौजा का था, जो प्रमिला देवी बनाम खुशी महतो एवं कमल महतो के बीच चल रहा था; इस मामले में दोनों पक्षों के दावों और कागजातों की स्क्रूटनी के बाद मौके पर ही इसका अंतिम निपटारा कर दिया गया। वहीं, दूसरा मामला हरली गांव से जुड़ा था, जिसमें प्रेम कुमार राणा बनाम रेखा देवी, अमित कुमार, सोनू एवं रीता देवी का पक्ष शामिल था; इस मामले से संबंधित भूमि अभिलेखों और कागजातों का अधिकारियों द्वारा बारीकी से अवलोकन किया गया, परंतु कतिपय तकनीकी कारणों से फिलहाल इस पर अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। तीसरा मामला पुंदौल गांव का था, जिसमें आवेदक नवल ठाकुर द्वारा रामेश्वर पासवान पर गैरमजरूआ खास भूमि पर अवैध अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया है; इस गंभीर मामले का प्रशासनिक स्तर पर अवलोकन और जांच की प्रक्रिया आगे जारी है। गौर करने वाली बात यह है कि ये तीनों विवाद थाना के अलावा पूर्व में बड़कागांव अंचल कार्यालय भी पहुंच चुके थे।

उपायुक्त के आदेश पर जारी हुआ जनता दरबार का मासिक रोस्टर

​भूमि विवादों के स्थाई समाधान के लिए हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय के पत्रांक 985 दिनांक 10 मई 2026 के निर्देशन तथा बड़कागांव अंचल कार्यालय के पत्रांक 543 दिनांक 15 मई 2026 के आलोक में पूरे प्रखंड के लिए एक स्थाई मासिक रोस्टर जारी किया गया है। नए नियम के तहत अब प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को बड़कागांव थाना परिसर में, प्रत्येक माह के द्वितीय एवं चतुर्थ शनिवार को बड़कागांव अंचल कार्यालय में तथा प्रत्येक माह के तृतीय शनिवार को उरीमारी ओपी परिसर में जमीन निपटारा से संबंधित जनता दरबार अनिवार्य रूप से आयोजित करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है, ताकि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के लिए भटकना न पड़े।

राजस्व कर्मचारी, अमीन और पुलिस अधिकारी रहे मौजूद

​जनता दरबार को पारदर्शी और विधिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए अंचल और थाना के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मुस्तैद रही। इस अवसर पर मुख्य रूप से अंचलाधिकारी मनोज कुमार, थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह, सब-इंस्पेक्टर (एसआई) राकेश खवास, अंचल निरीक्षक (सीआई) सह राजस्व कर्मचारी नंदकिशोर राम, राजस्व कर्मचारी मनीष पाठक, कुलदीप कुमार सिंह, अंचल अमीन नरेंद्र प्रसाद महतो सहित विनोद यादव, प्रेम राणा, प्रमिला देवी और बड़ी संख्या में विभिन्न गांवों से आए रैयत, फरियादी तथा स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (Land Revenue & Grievance Redressal Mechanism)

​📌 जानिए क्या होती है गैरमजरूआ खास भूमि और थाना दिवस जनता दरबार का कानूनी महत्व?

  • गैरमजरूआ खास भूमि (Gair Mazarua Khas Land): जमींदारी उन्मूलन के समय जो भूखंड (जैसे तालाब, परती, बगीचा या कृषि भूमि) तत्कालीन जमींदारों के निजी नियंत्रण या कब्जे में थे और बाद में बिहार/झारखंड भूमि सुधार अधिनियम के तहत सरकार में निहित हो गए, उन्हें गैरमजरूआ खास या 'मालिक' भूमि कहा जाता है। इस प्रकार की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या अतिक्रमण दंडनीय विधिक अपराध है और इसे केवल सरकार द्वारा ही लीज या बंदोबस्ती पर दिया जा सकता है।
  • थाना दिवस और जनता दरबार का विधिक महत्व: झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के नियमों के अनुसार, अंचल अधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) की संयुक्त उपस्थिति में आयोजित होने वाले जनता दरबार का उद्देश्य 'बिहार/झारखंड भूमि विवाद निराकरण अधिनियम' (Land Dispute Resolution Act) के तहत छोटे भूमि विवादों को आपसी सुलह, मापी (Demarcation) और राजस्व रिकॉर्ड के मिलान द्वारा मौके पर सुलझाना है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े और दीवानी न्यायालयों (Civil Courts) का बोझ कम हो सके।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: भूमि विवादों का ऑन-द-स्पॉट निपटारा और प्रशासनिक रोस्टर की चुनौतियां (Editorial)

बड़कागांव और उरीमारी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में त्रैमासिक और मासिक रोस्टर का कड़ाई से पालन होना जरूरी

हजारीबाग उपायुक्त हेमंत सती के निर्देश पर बड़कागांव में शुरू की गई यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। बड़कागांव और उरीमारी जैसे कोयला खनन प्रभावित और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जमीन से जुड़े विवाद केवल पारिवारिक या सामाजिक नहीं होते, बल्कि कई बार ये गंभीर आपराधिक घटनाओं और कानून-व्यवस्था के संकट का रूप ले लेते हैं। ऐसे में अंचलाधिकारी मनोज कुमार और थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से जनता दरबार लगाकर मामलों की सीधे सुनवाई करना प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को बहाल करता है।

हालांकि, 'न्यूज प्रहरी' का मानना है कि इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इसकी निरंतरता में छिपी है। अक्सर देखा जाता है कि शुरुआत में ऐसे जनता दरबार बड़े उत्साह के साथ आयोजित किए जाते हैं, परंतु समय बीतने के साथ रोस्टर केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। उपायुक्त कार्यालय के पत्रांक 985 और अंचल के पत्रांक 543 का कड़ाई से अनुपालन तभी संभव होगा जब हर शनिवार को अंचल और पुलिस की टीम बिना किसी नागा के निर्धारित स्थानों पर बैठेगी। इसके साथ ही, गैरमजरूआ खास भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में केवल 'अवलोकन' करने के बजाय त्वरित जांच कर अमीन की रिपोर्ट के आधार पर बेदखली की कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भू-माफियाओं में कड़ा प्रशासनिक संदेश जा सके।

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