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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग बार एसोसिएशन में शोक की लहर: युवा अधिवक्ता मोहम्मद मुख्तार का आकस्मिक निधन, 13 जुलाई को न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे अधिवक्ता

 

दो वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे अधिवक्ता मुख्तार, बार एसोसिएशन ने अपूरणीय क्षति बताया

संवाददाता, हजारीबाग:

हजारीबाग के कानूनी जगत से एक अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। बार एसोसिएशन, हजारीबाग के सक्रिय युवा अधिवक्ता मोहम्मद मुख्तार (39) का निधन 12 जुलाई 2026 को हो गया। वे विगत दो वर्षों से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे थे। रविवार सुबह लगभग 6:00 बजे शहर के चिश्तिया मोहल्ला स्थित अपने निजी आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली।

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​कानूनी पेशे में सक्रिय योगदान

​अधिवक्ता मोहम्मद मुख्तार वर्ष 2020 में बार एसोसिएशन से जुड़े थे और तब से निरंतर वकालत के पेशे में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपनी अल्प अवधि के करियर में उन्होंने अपनी मृदुभाषी और मिलनसार छवि के कारण सहकर्मियों के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाया था। वे अपने पीछे पत्नी और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनके लिए यह समय अत्यंत कष्टदायी है।

​शोक की लहर और बार एसोसिएशन का निर्णय

​अधिवक्ता के निधन की सूचना मिलते ही पूरे बार एसोसिएशन में शोक की लहर दौड़ गई। एसोसिएशन के वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिवक्ताओं ने एक स्वर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मोहम्मद मुख्तार का व्यक्तित्व बेहद नेक और मिलनसार था। अधिवक्ताओं ने उनके निधन को बार एसोसिएशन के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति बताया है, जिसे भविष्य में कभी पूरा नहीं किया जा सकता।

​बार एसोसिएशन के प्रभारी संयुक्त सचिव कुणाल कुमार ने जानकारी दी है कि स्वर्गीय मुख्तार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करने और उन्हें अंतिम नमन करने के लिए सोमवार, 13 जुलाई 2026 को बार एसोसिएशन भवन में एक शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शोक सभा के उपरांत जिले के सभी अधिवक्ता अपने आप को न्यायिक कार्यों से विरत रखेंगे और शोक स्वरूप न्यायालय के कार्यों में शामिल नहीं होंगे। पूरा कानूनी समुदाय दुख की इस घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है।

और पढ़ें: हजारीबाग: सुरक्षा व्यवस्था परखने सिविल कोर्ट पहुंचे SP अमन कुमार, प्रधान जिला जज के साथ किया पूरे परिसर का निरीक्षण

हजारीबाग सिविल कोर्ट: मासिक लोक अदालत में 82 मामलों का निष्पादन, 1.34 करोड़ से अधिक की राशि पर बनी सहमति

हजारीबाग सिविल कोर्ट: मासिक लोक अदालत में 82 मामलों का निष्पादन, 1.34 करोड़ से अधिक की राशि पर बनी सहमति

चेक बाउंस के मामलों में हुई रिकॉर्ड वसूली; 9 मई को आयोजित होगी 'नेशनल लोक अदालत', तैयारी शुरू।

हजारीबाग : आम नागरिकों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के उद्देश्य से हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को 'मासिक लोक अदालत' का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार के मार्गदर्शन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के तत्वावधान में आयोजित इस अदालत में सुलह-समझौते के आधार पर करोड़ों रुपये के वादों का निपटारा किया गया।

Masik lok Adalat

चेक बाउंस के मामलों का रहा दबदबा

इस लोक अदालत में कुल 82 मामलों का निष्पादन आपसी सहमति से किया गया। इस दौरान कुल 1 करोड़ 34 लाख 97 हजार 870 रुपये के सेटलमेंट पर पक्षकारों के बीच सहमति बनी। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक सफलता एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के मामलों में मिली, जहां 51 मुकदमों का निपटारा हुआ। अकेले चेक बाउंस के मामलों में 1 करोड़ 31 लाख 51 हजार 52 रुपये की राशि पर समझौता हुआ।

बिजली और बैंक रिकवरी के मामलों में भी राहत

लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों के मामलों को सुलझाया गया:

बिजली विभाग: कुल 27 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे सरकार को 2 लाख 32 हजार रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई।

बैंक रिकवरी: बैंक ऋण से संबंधित 2 महत्वपूर्ण मामलों को निष्पादित किया गया।

आपराधिक मामले: सुलहनीय प्रकृति के एक आपराधिक मामले को भी आपसी समझौते से बंद किया गया।

9 मई को लगेगी नेशनल लोक अदालत

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने जानकारी दी कि मासिक लोक अदालत की सफलता के बाद अब 9 मई को भव्य 'नेशनल लोक अदालत' का आयोजन किया जाएगा। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार के निर्देशानुसार, समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानूनी मदद पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। नेशनल लोक अदालत के लिए पक्षकारों को नोटिस और सूचनाएं भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस सफल आयोजन में न्यायिक पदाधिकारियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, हजारीबाग बार संघ के सदस्यों और सिविल कोर्ट के कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हजारीबाग: 9 मई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, दाखिल-खारिज और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों का होगा त्वरित समाधान

हजारीबाग: 9 मई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, दाखिल-खारिज और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों का होगा त्वरित समाधान

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ की उच्च स्तरीय बैठक; लंबित मामलों के निष्पादन पर दिया जोर।

हजारीबाग: न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से आगामी 9 मई को देशव्यापी 'राष्ट्रीय लोक अदालत' का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में भी इस वृहद अदालत की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं।

प्रधान जिला जज रंजीत कुमार

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक

गुरुवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के अध्यक्ष रंजीत कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के प्रशासनिक पदाधिकारियों को लोक अदालत की सफलता के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक का मुख्य फोकस आम जनता से जुड़े उन मामलों पर रहा जो लंबे समय से प्रखंड या जिला स्तर पर लंबित हैं।

इन प्रमुख मामलों का होगा निष्पादन

बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में न केवल आपराधिक (शमनीय) मामले, बल्कि आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े निम्नलिखित मुद्दों पर भी प्राथमिकता से सुनवाई होगी:

  • राजस्व मामले: अंचल कार्यालयों में लंबित दाखिल-खारिज (Mutation) के मामलों का निपटारा।

  • प्रमाण पत्र: जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र और विवाह निबंधन से जुड़े विवाद।

  • परिवहन: जिला परिवहन विभाग में लंबित जुर्माने और अन्य संबंधित मामले।

  • सामाजिक नियम: सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध के उल्लंघन से जुड़े मामले।

  • प्री-लिटिगेशन: वे मामले जो अभी कोर्ट तक नहीं पहुंचे हैं, उन्हें आपसी समझौते से सुलझाना।

जिला जज ने सचिव को दिए निर्देश

प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने DLSA सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी को निर्देश दिया कि वे सभी विभागों के साथ समन्वय बिठाएं ताकि अधिक से अधिक वादों का निष्पादन किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य जनता को कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति दिलाकर सुलह के आधार पर न्याय दिलाना है।

बैठक में उपस्थित रहे मुख्य अधिकारी

इस उच्च स्तरीय बैठक में सदर अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO) आदित्य पांडे, बरही SDO जॉन टुडु, जिला परिवहन पदाधिकारी बैद्यनाथ कामत और एसी हजारीबाग संतोष सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए। साथ ही कटकमदाग बीडीओ शिव बालक प्रसाद, सीओ अनिल कुमार गुप्ता (कटकमसांडी), सत्येंद्र नारायण (कटकमदाग), आशुतोष (सदर) और चुरचू सीआई ने भी हिस्सा लिया।

हजारीबाग: 9 मई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सुलह के आधार पर मुकदमों से छुटकारा पाने का सुनहरा मौका

हजारीबाग: 9 मई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, सुलह के आधार पर मुकदमों से छुटकारा पाने का सुनहरा मौका

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार ने अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों के साथ की बैठक; अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन का लक्ष्य।

 

 हजारीबाग: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) के निर्देशानुसार, आगामी

न्यायाधीश ने की उच्च स्तरीय बैठक मंगलवार को हजारीबाग के माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह चेयरमैन (DLSA), रंजीत कुमार ने अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकें कीं। बैठक के दौरान उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी को पक्षकारों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

9 मई को हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन होने जा रहा है
 

न्यायाधीश महोदय ने जोर देकर कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों का त्वरित और सुलभ निष्पादन करना है। उन्होंने न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुलहनीय वादों को चिन्हित कर संबंधित पक्षकारों को अविलंब नोटिस भेजने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

अधिवक्ताओं से सहयोग की अपील हजारीबाग बार संघ के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार और सचिव सुमन कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ हुई बैठक में न्यायाधीश ने आह्वान किया कि वे अपने मुवक्किलों को लोक अदालत के लाभों के बारे में बताएं। लोक अदालत में मामलों के निपटारे से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि आपसी सौहार्द भी बना रहता है।

कैसे करें आवेदन? वैसे पक्षकार जो अपने लंबित मामलों को आपसी समझौते या सुलह के आधार पर समाप्त करना चाहते हैं, वे किसी भी कार्य दिवस पर संबंधित न्यायालय में आवेदन दे सकते हैं। आवेदन के साथ पक्षकारों को निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न करने होंगे:

  • लोक अदालत आवेदन का निर्धारित फॉर्मेट।

  • पहचान पत्र की छाया प्रति (जैसे- वोटर आईडी, पैन कार्ड, आदि)।

  • संबंधित वाद की जानकारी और पक्षकारों के हस्ताक्षर।

अपील: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार ने हजारीबाग जिले के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे 9 मई को आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने लंबे समय से चल रहे विवादों को हमेशा के लिए समाप्त कराएं।  

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Hazaribagh News: विष्णुगढ़ हत्याकांड में कानूनी घेराबंदी तेज़, झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य ने SP को लिखा पत्र

Hazaribagh News: विष्णुगढ़ हत्याकांड में कानूनी घेराबंदी तेज़, झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य ने SP को लिखा पत्र

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता और हत्या के मामले में अब कानूनी जगत ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इस जघन्य अपराध को लेकर झारखंड राज्य विधिज्ञ परिषद् (Jharkhand State Bar Council) के निर्वाचित सदस्य और झारखंड हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत कुमार शिकारवार ने हजारीबाग पुलिस अधीक्षक (SP) को एक औपचारिक पत्र लिखकर मामले में त्वरित कार्रवाई और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ता हेमंत कुमार शिकारवार द्वारा हजारीबाग SP को भेजा गया आधिकारिक पत्र, जिसमें विष्णुगढ़ मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

कानूनी प्रावधानों और नई धाराओं पर जोर

अधिवक्ता हेमंत कुमार शिकारवार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल एक सामान्य अपराध नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। उन्होंने मांग की है कि FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 65(2) को कड़ाई से लागू किया जाए।

बता दें कि इस नई धारा के तहत 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में न्यूनतम 20 वर्ष के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, हत्या के लिए धारा 103(1) और POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल करने का आग्रह किया गया है।

गवाहों की सुरक्षा: 'विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम' की मांग

पत्र में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु गवाहों और पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर उठाया गया है। अधिवक्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 398 का हवाला देते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है। उन्होंने मांग की है कि:

पीड़ित परिवार और मुख्य गवाहों को 'कैटेगरी A' (जीवन को खतरा) के तहत सुरक्षा प्रदान की जाए।

जांच के दौरान गवाहों की गोपनीयता बरकरार रखी जाए ताकि स्थानीय प्रभाव या दबाव में आकर वे अपने बयानों से न भटकें।

BNSS की धारा 176(1) के तहत पीड़ित परिवार के बयानों की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराई जाए।

फॉरेंसिक साक्ष्य और डिजिटल फुटप्रिंट्स

अधिवक्ता ने पुलिस को तकनीकी रूप से भी सचेत किया है। पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, जैसे कि पत्थर (जिससे साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई) और अन्य फॉरेंसिक नमूनों की 'चेन ऑफ कस्टडी' को पूरी शुद्धता के साथ बनाए रखा जाए। साथ ही, 24-25 मार्च की रात के डिजिटल फुटप्रिंट्स और स्थानीय CCTV फुटेज को तुरंत सुरक्षित करने का आग्रह किया गया है ताकि अपराधी किसी भी तकनीकी खामी का लाभ न उठा सकें।

60 दिनों के भीतर चार्जशीट की समयसीमा

हजारीबाग बार एसोसिएशन और कानूनी समुदाय इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है। अधिवक्ता शिकारवार ने मांग की है कि 60 दिनों के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जाए, ताकि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) में हो सके। उनका कहना है कि प्रक्रियागत देरी अक्सर न्याय की राह में बाधा बनती है, जिसे इस मामले में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निष्कर्ष और सामाजिक चिंता

विष्णुगढ़ की इस घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां समाज में आक्रोश है, वहीं कानूनी विशेषज्ञों की यह सक्रियता यह सुनिश्चित करेगी कि अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सकें। अब सबकी निगाहें हजारीबाग पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। 

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