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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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New Delhi: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया 'VIP Culture in India' पुस्तक का विमोचन, कहा- हर भारतीय विशेष है!

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 'VIP Culture in India' पुस्तक का विमोचन किया। कहा- सार्वजनिक पद विशेषाधिकार नहीं, जिम्मेदारी है।
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​📘 नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया पुस्तक "वीआईपी कल्चर इन इंडिया" का विमोचन; कहा- हर भारतीय वीआईपी है

नई दिल्ली/रांची: उपराष्ट्रपती भवन, नई दिल्ली में आज एक गरिमापूर्ण समारोह के दौरान भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने "VIP Culture in India: Power, Privilege and the Distance from Democracy" (भारत में वीआईपी संस्कृति: शक्ति, विशेषाधिकार और लोकतंत्र से दूरी) नामक पुस्तक का विधिवत विमोचन किया। इस विचारोत्तेजक पुस्तक के लेखक पूर्व सांसद नबाम रेबिया हैं और इसके सह-लेखक संदीप कुमार हैं।

NEW DELHI: Vice President C. P. Radhakrishnan releasing the book "VIP Culture in India" along with former MP Nabam Rebia and former Arunachal Pradesh CM Nabam Tuki at Uprashtrapati Bhavan.

​🇮🇳 "हर भारतीय खास है, हर भारतीय वीआईपी है"

​समारोह में उपस्थित प्रबुद्ध जनों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कथन को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था— "प्रत्येक भारतीय विशेष है। हर भारतीय एक वीआईपी है।"

​उपराष्ट्रपति ने वीआईपी संस्कृति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि:

  • ​समाज में दिखने वाले विशेष अधिकार (Visible Privileges) और कुछ लोगों को मिलने वाले तरजीही इलाज का अहसास जनता के भरोसे को कमजोर करता है।
  • ​यह वीआईपी संस्कृति आम नागरिकों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच एक तरह की दूरी पैदा कर देती है।
  • ​लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब सार्वजनिक पद या सरकारी सेवा को एक विशेषाधिकार (Privilege) के बजाय एक जिम्मेदारी (Responsibility) के रूप में देखा और समझा जाए।

​🤝 कई पूर्व मुख्यमंत्री और गणमान्य लोग रहे मौजूद

​इस उच्च स्तरीय पुस्तक विमोचन समारोह के अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी, पूर्व सांसद डब्ल्यू. आर. खारलुखी सहित देश के कई अन्य वरिष्ठ शिक्षाविद, राजनेता और गणमान्य व्यक्ति मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी ने इस पुस्तक की सराहना करते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक जरूरी विमर्श बताया।

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