सड़क पर घायलों की मदद करने वाले बनेंगे 'गुड सेमेरिटन' पुलिस-प्रशासन के चक्कर से मिलेगी मुक्ति- संयुक्त जांच अभियान में चालकों को किया गया जागरूक
हजारीबाग: सड़क हादसों में कमी लाने और आम नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से हजारीबाग में एक अनूठी पहल देखने को मिली। जिला परिवहन कार्यालय और यातायात पुलिस ने शहर के प्रमुख चौराहों पर एक विशेष संयुक्त वाहन जांच अभियान चलाया, जो चालान काटने से ज्यादा जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहा। इस अभियान में सड़क सुरक्षा टीम ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों को रोककर उन्हें दंडित करने के बजाय सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाया।
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह सहयोगात्मक था। जांच टीम ने नियम तोड़ने वाले चालकों की मौके पर ही काउंसलिंग की और उन्हें समझाया कि यातायात नियमों का पालन पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए करना अनिवार्य है। जागरूकता बढ़ाने के लिए चालकों के बीच सुरक्षा नियमों और यातायात संकेतों की जानकारी देने वाले पंपलेट भी वितरित किए गए, ताकि वे भविष्य में इन गलतियों को न दोहराएं।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने 'गुड सेमेरिटन' यानी 'नेक मददगार' कानून पर विशेष जोर दिया। अक्सर देखा जाता है कि सड़क दुर्घटना होने पर लोग कानूनी पचड़ों और पुलिस की पूछताछ के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। टीम ने वाहन चालकों के मन से इस डर को निकालते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले को अब पुलिस या कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार और कानून ऐसे मददगारों को संरक्षण देता है और उन्हें प्रोत्साहित करता है।
मौके पर मौजूद रोड इंजीनियर एनालिस्ट (सड़क सुरक्षा) सारिक इकबाल ने इस मुहिम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि चालकों के व्यवहार में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि जब लोग जागरूक होंगे और बिना डर के 'गुड सेमेरिटन' बनकर आगे आएंगे, तो दुर्घटना के समय घायलों को त्वरित मदद मिल सकेगी और कई कीमती जानें बचाई जा सकेंगी। प्रशासन की इस गांधीगिरी और जागरूकता पहल की आम लोगों ने भी सराहना की है।

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