आजाद हिंद फौज के प्रणेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कांग्रेसियों ने अर्पित की भावांजलि, उनके अदम्य साहस को किया नमन
हजारीबाग: स्वाधीनता संग्राम के महानायक और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे ओजस्वी नारों से भारतीय जनमानस में राष्ट्रभक्ति का ज्वार भाटा पैदा करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 128वीं जयंती गुरुवार को हजारीबाग जिला कांग्रेस कार्यालय, कृष्ण बल्लभ आश्रम में 'पराक्रम दिवस' के रूप में अत्यंत गरिमामय ढंग से मनाई गई। इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नेताजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और माल्यार्पण कर उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट की।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री सह जिला अध्यक्ष जय प्रकाश भाई पटेल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि नेताजी का व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जो युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेताजी ने अपनी प्रखर मेधा और अदम्य साहस के बल पर अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। उनके द्वारा गठित 'आजाद हिंद फौज' ने न केवल सैन्य मोर्चे पर अंग्रेजों को चुनौती दी, बल्कि भारत की एकता और अखंडता का एक अनुपम उदाहरण पेश किया। पटेल ने कहा कि नेताजी द्वारा दिया गया 'चलो दिल्ली' का नारा और 'जय हिंद' का उद्घोष आज भी प्रत्येक भारतीय की नसों में देशभक्ति का संचार करता है।
वरिष्ठ नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश की पूर्ण स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वे एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी विदेशी धरती से भारत की आजादी का शंखनाद किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में उनके उच्च आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश और जिले के प्रमुख पदाधिकारियों समेत भारी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिन्होंने एक स्वर में राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया

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