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Editor: Naresh Prasad Soni
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इचाक की धरती पर गूंजा 'जननायक' का जयघोष: पूंजीवाद के शोर में समाजवाद की मशाल जलाने का आह्वान, कहा- वंचितों की आवाज थे कर्पूरी

इचाक की धरती पर गूंजा 'जननायक' का जयघोष: पूंजीवाद के शोर में समाजवाद की मशाल जलाने का आह्वान, कहा- वंचितों की आवाज थे कर्पूरी


नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

इचाक/हजारीबाग| 28 जनवरी 2026

इचाक प्रखंड मुख्यालय स्थित परियोजना बालिका उच्च विद्यालय का समीपवर्ती प्रांगण बीते 27 जनवरी को सामाजिक न्याय के पुरोधा और गुदड़ी के लाल कहे जाने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों से गुंजायमान हो उठा। उनकी पावन जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य समारोह में आदर्श युवा संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष गौतम कुमार की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक नई वैचारिक ऊँचाई प्रदान की। हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब और प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि दशकों बाद भी कर्पूरी ठाकुर के आदर्श जनमानस के पटल पर अमिट हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता गौतम कुमार ने इतिहास और वर्तमान के धागों को पिरोते हुए एक अत्यंत ओजस्वी और विचारोत्तेजक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। एक बेहद सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद, विषम परिस्थितियों को मात देकर और केवल अपने दृढ़ विचारों के बलबूते बिहार के दो-दो बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने लोकतंत्र की असली ताकत का एहसास कराया। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में सर्वप्रथम शराबबंदी जैसा साहसिक और ऐतिहासिक कानून लागू करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। शोषितों, वंचितों और दबे-कुचले वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर उन्होंने जो सामाजिक क्रांति की मशाल जलाई, उसी रोशनी में आज समाज का बड़ा तबका मुख्यधारा में कदमताल कर रहा है।

अपने संबोधन को विस्तार देते हुए कुमार ने भारतीय समाज की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि यह देश त्याग और बलिदान के स्तंभों पर टिका है। जहाँ राजपूत समाज ने महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और राणा सांगा जैसे वीर सपूत देकर राष्ट्र की रक्षा की, वहीं कुशवाहा समाज ने महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और भगवान गौतम बुद्ध जैसे युगद्रष्टा दिए जिन्होंने समाज को ज्ञान और समता का मार्ग दिखाया। उन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को नमन करते हुए कहा कि हरिजन समाज में जन्मे इस महामानव ने देश को विधि के विधान से जोड़कर एक सूत्र में पिरोया। समाज इन विभूतियों का सदैव ऋणी रहेगा क्योंकि इन्होंने अपना सर्वस्व समाज को समर्पित कर दिया।

वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए गौतम कुमार ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस दौर में समाजवाद जिंदा था, वहां संवेदनाएं थीं, किंतु आज के दौर में पूंजीवाद हावी होता जा रहा है, जो मानवीय मूल्यों को निगल रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में समाजवाद के मूल तत्वों का निर्वहन करें। कार्यक्रम के दौरान हजारों की संख्या में मौजूद समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने बारी-बारी से अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए और जननायक के बताए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प दोहराया। इस वैचारिक महाकुंभ ने इचाक के वातावरण में सामाजिक समरसता की एक नई सुगंध बिखेर दी।


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