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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग में हाथियों के तांडव ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, खेत बचाने गए किसान को कुचलकर मार डाला

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हजारीबाग में हाथियों के तांडव ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, खेत बचाने गए किसान को कुचलकर मार डाला



हजारीबाग। हजारीबाग में इंसान और वन्यजीवों के बीच वर्चस्व की जंग अब खौफनाक रूप ले चुकी है और इस द्वंद्व का अंत होता नहीं दिख रहा। इसी खूनी संघर्ष का एक और काला अध्याय बीती रात सदर प्रखंड के चुटियारो गांव में लिखा गया, जहां अपनी मेहनत की फसल बचाने गए एक दम्पत्ति पर हाथियों के झुंड ने कहर बरपा दिया। इस हृदयविदारक घटना में एक किसान को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ी, जबकि उनकी पत्नी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद अब खतरे से बाहर हैं। यह घटना बताती है कि कैसे जंगलों के अतिक्रमण का खामियाजा अब निर्दोष ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

​दिल दहला देने वाली यह घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, चुटियारो निवासी 50 वर्षीय आदित्य राणा अपनी पत्नी शांति देवी के साथ कुम्भियाटांड़ स्थित अपने टमाटर के खेत की रखवाली करने गए थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि मौत वहां पहले से घात लगाए बैठी है। अचानक हाथियों के एक उग्र झुंड ने उन पर धावा बोल दिया। इस हमले में आदित्य राणा को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथियों ने उन्हें बेरहमी से पटककर मार डाला। मृतक अपने पीछे तीन बेटियों और एक बेटे का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। गनीमत रही कि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गईं।

​घटना की जानकारी मिलते ही हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया और प्रशासन को सक्रिय किया। सांसद के निर्देश पर घायलों का हालचाल जाना गया और चिकित्सकों से बेहतर इलाज सुनिश्चित करवाया गया। डॉ. अभिषेक कुमार के अनुसार घायल शांति देवी अब खतरे से बाहर हैं। इधर, वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए अंत्येष्टि के लिए परिजनों को तत्काल पच्चीस हजार रुपये की मुआवजा राशि सौंपी और शेष भुगतान सरकारी प्रक्रिया के तहत जल्द करने का आश्वासन दिया। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।

​यह दुखद घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन की गवाही है जहां जंगलों के सिमटने से वन्यजीव रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों से बलपूर्वक नहीं जीता जा सकता, बल्कि सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का एकमात्र उपाय है। हम उनके आशियाने उजाड़ रहे हैं, इसलिए वे हमारे आंगन तक आ पहुंचे हैं। प्रशासन और वन विभाग को हाथियों के मार्गों पर निगरानी बढ़ाने और 'हाथी भगाओ दस्ता' को और अधिक सक्रिय करने की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार का चिराग इस तरह न बुझे।

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