मुख्यमंत्री पशुधन योजना से बदली बड़कागांव के अरुण की तकदीर, डेयरी फार्म बना ग्रामीण उद्यमिता का मिसाल
नरेश सोनी विशेष संवाददाता
हजारीबाग: जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पशुधन योजना के सहयोग ने बड़कागांव के एक साधारण किसान को सफल उद्यमी बना दिया है। बड़कागांव प्रखंड के गुरचट्टी गांव निवासी अरुण कुमार ने सरकारी सहायता और अपनी कड़ी मेहनत के मेल से ग्रामीण आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी है। गव्य विकास विभाग के तकनीकी सहयोग से मात्र 5 गायों से शुरू हुआ यह सफर आज 18 गायों के विशाल सीता डेयरी फार्म तक जा पहुँचा है। अरुण कुमार ने न केवल दूध उत्पादन में महारत हासिल की है बल्कि वे आज प्रतिदिन लगभग 185 लीटर दूध की आपूर्ति स्थानीय बाजारों, होटलों और विद्यालयों में कर रहे हैं। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही दिशा में लाभ उठाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े आर्थिक बदलाव लाए जा सकते हैं।
अरुण कुमार की सफलता का सबसे बड़ा राज आधुनिक तकनीक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करना रहा है। शुरुआती दौर में विदेशी नस्ल की गायों से अनुभव लेने के बाद उन्होंने भारतीय वातावरण के अनुकूल साहीवाल, गिर और देशी गायों पर ध्यान केंद्रित किया जिससे पशुओं के बीमार होने की दर कम हुई। डेयरी को वैज्ञानिक रूप देने के लिए उन्होंने काऊ रबर मैट और मिल्किंग मशीन जैसी आधुनिक सुविधाओं को अपनाया। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने राज्य सरकार की नीति से प्रेरित होकर 3 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट और सोलर वाटर हीटर स्थापित किया है जिससे बिजली की समस्या का स्थायी समाधान हो गया। इसके अलावा बायोगैस प्लांट के माध्यम से वे स्वच्छ ईंधन के साथ-साथ जैविक खाद भी तैयार कर रहे हैं जिसका उपयोग वे स्वयं उन्नत चारा उगाने में करते हैं।
इस डेयरी फार्म ने न केवल अरुण कुमार की आर्थिक स्थिति को सुधारा है बल्कि उनके परिवार के सपनों को भी नई उड़ान दी है। डेयरी की आय से ही उन्होंने अपनी बड़ी बेटी का विवाह संपन्न किया और बेटे को दिल्ली से इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा दिलाई जो आज दिल्ली में अपनी खुद की कंपनी संचालित कर रहा है। अरुण कुमार अब केवल दूध ही नहीं बल्कि पनीर, मिठाई और वर्मी कंपोस्ट के माध्यम से भी अतिरिक्त आय सृजित कर रहे हैं। हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने अरुण कुमार की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे जिले के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल बताया है। आज सीता डेयरी फार्म तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और वैज्ञानिक पशुपालन के अद्भुत संगम के रूप में पूरे जिले में अपनी पहचान बना चुका है।