हजारीबाग में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना से बदली उमेश भुइयां की तकदीर, मजदूरी छोड़ सूकर पालन से बने लखपति
हजारीबाग : पदमा प्रखंड अंतर्गत ग्राम कण्डदाग निवासी उमेश भुइयां की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा आज जिले के अन्य ग्रामीणों के लिए आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल बन गई है। कभी दिहाड़ी मजदूरी कर बमुश्किल अपने परिवार का गुजारा करने वाले उमेश भुइयां ने जिला प्रशासन के सहयोग और मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना को अपनाकर न केवल अपनी गरीबी को मात दी है बल्कि आज वे लाखों की सालाना आय अर्जित कर रहे हैं। जिला प्रशासन हजारीबाग के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा उन्हें अनुदान पर नर और मादा सूकर उपलब्ध कराने के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित टीकाकरण और बीमा जैसी सुविधाएं प्रदान की गईं। उमेश ने विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर इस छोटे से प्रयास को एक बड़े व्यवसाय में तब्दील कर दिया है जिसके फलस्वरूप आज उनके पास करीब अस्सी सूकरों का विशाल फार्म है। जहाँ पहले उनकी मासिक आय कुछ ही हजार रुपयों तक सीमित थी वहीं अब वे प्रतिवर्ष सैकड़ों सूकर बच्चों की बिक्री कर तीन से पांच लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रहे हैं। इस आर्थिक सशक्तीकरण का सीधा प्रभाव उनके सामाजिक जीवन पर भी पड़ा है जिससे उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला अच्छे विद्यालयों में कराया और कच्चे मकान की जगह दस कमरों का पक्का शेड निर्मित कर अपने व्यापार को विस्तारित किया है। उपायुक्त श्री शशि प्रकाश सिंह ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य पारदर्शी क्रियान्वयन और तकनीकी सहयोग के जरिए हर ग्रामीण को स्वरोजगार से जोड़ना है। उमेश भुइयां की यह प्रेरक कहानी साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकते हैं।