धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए साहिबजादों का बलिदान युगों तक रहेगा अमर, हजारीबाग में गूंजी वीरता की गाथा
हजारीबाग। गुरु गोविंद सिंह पार्क में 'वीर बाल दिवस' के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में साहिबजादों की वीरता और धर्म-रक्षा के संकल्प को याद कर पूरा वातावरण श्रद्धा और गौरव से भर उठा। दशम पिता गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह दिन केवल शोक का नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने की प्रेरणा का प्रतीक है।
"शेर के बच्चे शहीद हुए हैं, पर सियार खुश न हो..."
कार्यक्रम के दौरान दशम पिता गुरु गोविंद सिंह जी के उस अमर संदेश को दोहराया गया, जो उन्होंने औरंगजेब को भेजा था— “चि शुद गर शिगाले व मकरो रिया, हमीं कुश्त दो बच्च ए शेर रा” (क्या हुआ यदि सियार ने छल-कपट से शेर के दो बच्चों को मार दिया, अभी कुंडलधारी महाविष सर्प शेष है)।
9 वर्षीय साहिबजादा जोरावर सिंह और 6 वर्षीय साहिबजादा फतेह सिंह द्वारा दीवार में जिंदा चुनवाए जाने की क्रूरता को सहर्ष स्वीकार करने, किंतु धर्म और आत्म-सम्मान से समझौता न करने की गाथा सुनकर उपस्थित जनसमूह की आंखें नम हो गईं।
सांसद और विधायक ने दी श्रद्धांजलि
समारोह को संबोधित करते हुए हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल और सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' घोषित करना उन नन्हे बलिदानियों के प्रति राष्ट्र की सच्ची श्रद्धांजलि है। भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह और विनय जायसवाल सहित अन्य वक्ताओं ने भी साहिबजादों के जीवन से सीख लेने का आह्वान किया।
सिख समाज का अटूट लंगर और सेवा भाव
हजारीबाग सिख समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु का अटूट लंगर चलाया गया। सेवा, समर्पण और समानता के सिद्धांतों को चरितार्थ करते हुए सैकड़ों लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में सिख समाज के प्रबुद्ध जनों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
ऐतिहासिक गौरव का दिन
उपस्थित गणमान्यजनों ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम उस इतिहास के साक्षी हैं जहाँ नन्हे बालकों ने अपनी शहादत देकर भारत की संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षा की। यह आयोजन भावी पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की एक सशक्त कड़ी साबित हुआ।