जमींदारी उन्मूलन के प्रणेता के.बी. सहाय की 128वीं जयंती, हजारीबाग में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
हजारीबाग: 'आधुनिक बिहार' के निर्माताओं में शुमार और संयुक्त बिहार के तीसरे मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय की 128वीं जयंती बुधवार को हजारीबाग स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय, कृष्ण बल्लभ आश्रम में गरिमापूर्ण तरीके से मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
स्वतंत्रता संग्राम से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को साझा किया। वक्ताओं ने कहा कि 31 दिसंबर 1898 को पटना के शेखपुरा में जन्मे के.बी. सहाय का हजारीबाग से गहरा नाता था। उन्होंने हजारीबाग के प्रतिष्ठित सेंट कोलंबा कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और तुरंत आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।
क्रांतिकारी नेतृत्व: 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक, उन्होंने हजारीबाग में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ मोर्चे का नेतृत्व किया और कई बार जेल गए।
ऐतिहासिक सुधार: देश के पहले जमींदारी उन्मूलन कानून को लागू करने का श्रेय के.बी. सहाय को ही जाता है। राजस्व मंत्री और फिर मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने गरीब किसानों को भूमि का अधिकार दिलाकर सामाजिक क्रांति की नींव रखी।
सादा जीवन और दूरदर्शी सोच
नेताओं ने उनके प्रशासनिक कौशल और सादगी की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने सैनिक स्कूल तिलैया की स्थापना और शिक्षा के प्रसार के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। हजारीबाग के विकास के लिए उनका समर्पण आज भी कृष्ण बल्लभ महाविद्यालय जैसे संस्थानों के रूप में जीवित है। ज्ञात हो कि 5 मई 1974 को एक सड़क दुर्घटना में इस महान विभूति का निधन हो गया था।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश महासचिव बिनोद कुशवाहा, वरिष्ठ कांग्रेसी अशोक देव, पूर्व अध्यक्ष आबिद अंसारी, जिला मीडिया अध्यक्ष निसार खान, अजय गुप्ता, सुनील सिंह राठौर, और विभिन्न प्रखंडों के अध्यक्षों सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में उनके प्रशासनिक कौशल और जनसेवा के प्रति उनके अटूट समर्पण को
नमन किया।