आत्मसमर्पित नक्सलियों और कैदियों के बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी, सरकारी आवास दबाकर बैठे अफसरों पर भी डीसी ने कसा शिकंजा
नरेश सोनी विशेष संवाददाता
हजारीबाग: उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने प्रशासनिक कार्यों में मानवीय संवेदना और अनुशासन का अनोखा संगम पेश करते हुए सामान्य शाखा की समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए हैं। उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुख्यधारा में लौटने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत मिलने वाली तमाम सुविधाएं बिना किसी विलंब के मुहैया कराई जाएं ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसके साथ ही प्रशासन ने झारखंड खुला जेल सह पुनर्वास केंद्र में रहने वाले कैदियों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब यहां के कैदियों को कौशल विकास और प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। प्रशासन ने कैदियों के बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए दो से छह वर्ष के बच्चों को नजदीकी आंगनवाड़ी से जोड़ने और छह वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का नामांकन शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत सरकारी स्कूलों में कराने का आदेश दिया है।
बैठक में उपायुक्त ने शिक्षा और साक्षरता पर विशेष जोर देते हुए उल्लास योजना और ज्ञान केंद्र के जरिए शहरी क्षेत्र के निरक्षर नागरिकों को साक्षर बनाने की मुहिम को धरातल पर उतारने को कहा। अभिभावकों के लिए राहत की खबर यह है कि राइट टू एजुकेशन (आरटीई) पोर्टल आगामी 14 जनवरी को खोल दिया जाएगा जिससे नामांकन प्रक्रिया सुगम होगी। मानवाधिकार और एससी-एसटी आयोग से जुड़े मामलों पर भी गंभीरता दिखाते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों को इन फाइलों का गहरा अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है ताकि लंबित मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।
प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए उपायुक्त ने उन अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है जो स्थानांतरण के बावजूद लंबे समय से जिला स्तर के सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। ऐसे सभी पदाधिकारियों को तत्काल नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा बैठक में झारखंड आंदोलनकारियों की पेंशन, शस्त्र अनुज्ञप्ति और बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आदेश दिया गया ताकि आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को दो टूक कहा है कि इन निर्देशों का पालन केवल कागजों पर नहीं बल्कि धरातल पर समय सीमा के भीतर दिखना चाहिए।
