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Editor: Naresh Prasad Soni
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झारखंडी कौन? जिसके पास हो खतियान', आंदोलन के अविस्मरणीय पुरोधा एडी नंदी की पुण्यतिथि पर गूंजा माटी की अस्मिता का सवाल

झारखंडी कौन? जिसके पास हो खतियान', आंदोलन के अविस्मरणीय पुरोधा एडी नंदी की पुण्यतिथि पर गूंजा माटी की अस्मिता का सवाल

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

हजारीबाग।

हजारीबाग के जेपीएम हॉस्पिटल परिसर में बुधवार को खतियानी परिवार के संस्थापक और पृथक झारखंड आंदोलन के अग्रणी योद्धा स्वर्गीय एडी नंदी की 17वीं पुण्यतिथि अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने न केवल दिवंगत आत्मा के संघर्षों को याद किया, बल्कि राज्य गठन के ढाई दशक बाद भी 'झारखंडी पहचान' की परिभाषा तय न हो पाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ए.के. मेहता ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पी.के. भंडारी ने शिरकत की।

मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. भंडारी ने स्वर्गीय नंदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें एक सच्चा कर्मयोद्धा बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1939 में हजारीबाग के हरनगंज में जन्मे एडी नंदी ने अपना संपूर्ण जीवन समाज और राजनीति को समर्पित कर दिया। वर्ष 1970 में झारखंड पार्टी के प्रमुख एनी होरो के साथ मिलकर उन्होंने अलग राज्य की अलख जगाई और इस दौरान वे कई बार जेल भी गए। कोयलांचल में मजलूम मजदूरों को संगठित कर उनके हक की आवाज बुलंद करने वाले नंदी जी ने विधानसभा चुनाव भी लड़ा और ताउम्र शोषितों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। लंबी बीमारी के बाद वर्ष 2009 में एम्स, नई दिल्ली में उनका देहावसान हुआ, लेकिन उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।

सभा का संचालन करते हुए मोहम्मद हकीम ने ऐतिहासिक संदर्भों को साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य गठन से पूर्व 1997 में गठित झारखंड कोर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) के पांच सदस्यीय बौद्धिक प्रतिनिधिमंडल में स्वर्गीय नंदी शामिल थे। राज्य गठन के ठीक बाद 16 नवंबर को सदर प्रखंड के चपवा में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में उन्होंने ही वह कालजयी नारा दिया था- "झारखंडी कौन? झारखंडी की पहचान, जिसके पास हो खतियान।" वक्ताओं ने क्षोभ व्यक्त किया कि राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी सत्ता पक्ष और विपक्ष स्थानीयता को परिभाषित करने में विफल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप यहां के नौजवान पलायन का दंश झेलने को विवश हैं।

कार्यक्रम के अंत में जिला अध्यक्ष अशोक राम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर केंद्रीय अध्यक्ष बाबू भाई विद्रोही, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद फखरुद्दीन, मोहम्मद मुस्तकीम, विजय मिश्रा, अलीजान मियां, बोधी साहब, महेश विश्वकर्मा, अमर कुमार गुप्ता, प्रदीप कुमार मेहता, बिंदु देवी, सीता देवी, चंदन कुमार गुप्ता और नितेश कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे और दिवंगत नेता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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