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Editor: Naresh Prasad Soni
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बेटियों के सपनों को मिली हॉकी की उड़ान, झारखंड में खेल का मैदान बना महिला सशक्तिकरण का नया केंद्र

बेटियों के सपनों को मिली हॉकी की उड़ान, झारखंड में खेल का मैदान बना महिला सशक्तिकरण का नया केंद्र

रांची। झारखंड की धरती हमेशा से हॉकी की नर्सरी रही है, लेकिन आज यहाँ की बेटियाँ केवल खिलाड़ी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की मिसाल बन रही हैं। वर्तमान परिदृश्य में जब मैदान की ओर नजर जाती है, तो वहां सिर्फ खेल नहीं, बल्कि उन बेटियों का संघर्ष और जुनून दिखाई देता है जिन्होंने सामाजिक सीमाओं की बेड़ियों को तोड़कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

हॉकी: खेल से बढ़कर सशक्तिकरण का माध्यम

आज महिला हॉकी देश में सिर्फ एक खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह नारी सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। भारतीय महिला हॉकी टीम की वैश्विक स्तर पर मिली शानदार सफलताओं ने झारखंड की अनगिनत बेटियों के मन में यह विश्वास जगाया है कि वे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहरा सकती हैं और नेतृत्व कर सकती हैं।

सुरक्षित और समान अवसरों वाला 'नया झारखंड'

राज्य सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है—खेल का मैदान बेटियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाला स्थान हो। सरकार का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे वातावरण का निर्माण करना है जहाँ:
हर बेटी बिना किसी भेदभाव के अपने सपनों को जी सके।
मैदानों में डर की कोई जगह न हो।

बेटियाँ न केवल खेलें, बल्कि अपने भविष्य का नेतृत्व भी खुद करें।

कल्पना सोरेन का विजन: "जुनून से पहचान तक"
कल्पना सोरेन ने साझा किया कि राज्य की बेटियाँ आज खेल के माध्यम से समाज को यह संदेश दे रही हैं कि यदि उन्हें सही अवसर मिले, तो वे आसमान छू सकती हैं। सरकार की नीतियां अब इसी सोच के इर्द-गिर्द बुनी जा रही हैं कि खेल के माध्यम से बेटियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

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