भुवनेश्वर के किसस में अंतरराष्ट्रीय राजनीति विज्ञान सम्मेलन का आगाज, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने दर्ज कराई उपस्थिति
हजारीबाग: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (किसस) में आयोजित 62वें इंडियन पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन (इप्सा) के दो दिवसीय सम्मेलन में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों ने अपनी विद्वता की छाप छोड़ी है। राजनीति विज्ञान के शिक्षकों और शोधार्थियों के देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संगठन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय इस वर्ष "वी द पीपल ऑफ भारत" रखा गया है, जिस पर मंथन करने के लिए देशभर के दिग्गज जुटे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा ने इस भागीदारी पर हर्ष जताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से शिक्षकों को वैश्विक स्तर का एकेडमिक एक्सपोजर मिलता है जो शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अनिवार्य है। विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने विश्वविद्यालय की निरंतर भागीदारी की सराहना की, जबकि पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बालेश्वर प्रसाद सिंह ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर विशिष्ट वक्ता के रूप में हजारीबाग का मान बढ़ाया। इस गौरवशाली सम्मेलन में बरकट्ठा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बलदेव राम समेत डॉ. रोशन कुमार, डॉ. लाडली कुमारी और डॉ. आदित्य कुमार पंकज जैसे प्राध्यापकों के शोध पत्र स्वीकृत हुए हैं, जो बदलते राजनीतिक परिवेश में नए आयाम प्रस्तुत करेंगे। शोधार्थी डॉ. हरीश कुमार, डॉ. समीर कुमार, अनदीप कुमार, संतोष रजक और रवि विश्वकर्मा ने भी अपने मौलिक विचारों और आलेखों के माध्यम से सम्मेलन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सक्रियता को प्रमाणित किया है। यह आयोजन न केवल नए शोधों को मंच प्रदान कर रहा है बल्कि राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य की दिशा तय करने में भी सहायक सिद्ध हो रहा है।
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