हजारीबाग पुलिस का राहुल दुबे गैंग पर बड़ा प्रहार- उरीमारी गोलीकांड का सफल उद्भेदन, हथियारों के जखीरे के साथ 10 शूटर गिरफ्तार
हजारीबाग: हजारीबाग पुलिस ने संगठित अपराध और लेवी वसूलने वाले गिरोहों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने कुख्यात राहुल दुबे गिरोह के दस सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर न केवल उरीमारी में हुए गोलीकांड का पर्दाफाश किया है बल्कि क्षेत्र में एक बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की साजिश को भी नाकाम कर दिया है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से पुलिस ने पांच देसी पिस्टल, सत्रह जिंदा कारतूस और छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं जो इनकी खतरनाक मंशा को जाहिर करने के लिए काफी हैं।
मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 को उरीमारी थाना क्षेत्र में दसई मांझी के घर पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद से पुलिस लगातार अपराधियों की तलाश में थी। इस घटना की जिम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने ली थी। कांड के उद्भेदन के लिए सदर एसडीपीओ अमित आनंद के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इसी बीच पुलिस अधीक्षक को गुप्त सूचना मिली कि उरीमारी के बधरैया फुटबॉल मैदान के पास गिरोह का सक्रिय सदस्य शिवराज उर्फ शिवा अपने सहयोगियों के साथ हथियारों से लैस होकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा है। सूचना मिलते ही एसआईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही अपराधी भागने की कोशिश करने लगे लेकिन जवानों ने खदेड़कर दस लोगों को दबोच लिया।
पुलिस पूछताछ में अपराधियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरफ्तार अपराधियों ने स्वीकार किया कि 31 दिसंबर को दसई मांझी के घर पर फायरिंग उन्होंने ही की थी। इसके अलावा उन्होंने 24 दिसंबर को सोनाराम मांझी की गाड़ी पर हुई फायरिंग में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। अपराधियों ने बताया कि उन्होंने विस्थापित नेता गणेश गड्डू की गाड़ी समझकर गलती से सोनाराम मांझी की गाड़ी पर गोली चला दी थी। गिरफ्तार आरोपियों में शिवराज उर्फ शिवा, प्रीत कुमार, पीयूष कुमार सिंह, प्रेम कुमार, बादल, बिक्रम कुमार राम, मोहित सिंह, राजू कुमार, विशाल कुमार और मनोज कुमार शामिल हैं। इनमें से शिवा और बिक्रम का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वे पहले भी गोलीबारी की घटनाओं में जेल जा चुके हैं।
इस सफल ऑपरेशन में सदर एसडीपीओ अमित आनंद, बड़कागांव एसडीपीओ पवन कुमार, इंस्पेक्टर ललित कुमार, गिद्दी थाना प्रभारी राणा भानु प्रताप सिंह, उरीमारी ओपी प्रभारी सोनू उरांव, बड़कागांव थाना प्रभारी कृष्ण कुमार गुप्ता सहित तकनीकी और नक्सल शाखा के कई पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जिले में लेवी और रंगदारी के लिए दहशत फैलाने वाले गिरोहों के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
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