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Editor: Naresh Prasad Soni
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एमएसएमई मंत्रालय ने डिजिटल क्रांति और खादी को दी नई रफ्तार, साइबर सुरक्षा से लेकर वैश्विक पटल तक भारत का डंका










एमएसएमई मंत्रालय ने डिजिटल क्रांति और खादी को दी नई रफ्तार, साइबर सुरक्षा से लेकर वैश्विक पटल तक भारत का डंका

नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने वर्ष 2025 में तकनीक और परंपरा के अद्भुत संगम के साथ विकास की नई इबारत लिखी है। एक तरफ जहां मंत्रालय ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए उद्यमों को हाईटेक बनाया है, वहीं दूसरी तरफ खादी और ग्रामोद्योग को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट बताती है कि यह साल न केवल डिजिटल सशक्तिकरण का रहा बल्कि जमीनी स्तर पर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ऐतिहासिक साबित हुआ है।

अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाते हुए मंत्रालय ने 'साइबर जागृत भारत' अभियान के तहत व्यापक पहल की। इसमें इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के सहयोग से अधिकारियों और उद्यमियों को साइबर हमलों से बचने, पासवर्ड सुरक्षा और साइबर स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में मंत्रालय ने एक आधुनिक परफॉर्मेंस स्मार्टबोर्ड विकसित किया है। यह केंद्रीकृत डैशबोर्ड अब एक ही क्लिक पर बाजार समर्थन, ऋण सुविधा और प्रमुख योजनाओं की जानकारी आम जनता और हितधारकों तक पहुंचा रहा है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हुई है। इसके साथ ही पीएम गति शक्ति योजना के तहत लाखों संपत्तियों का डिजिटल मानचित्रण कर बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया गया है।

ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने भी इस वर्ष बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कारीगरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए सरकार ने कताई और बुनाई की मजदूरी में बढ़ोतरी की, जिसका सीधा लाभ जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिल्पकारों को मिला है। खादी महोत्सव और वोकल फॉर लोकल अभियान ने स्वदेशी उत्पादों की मांग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया, जिसके परिणामस्वरूप खादी की बिक्री और उत्पादन के आंकड़ों में भारी उछाल दर्ज किया गया। इसी तरह नारियल रेशा क्षेत्र ने भी पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। नई मशीनों के विकास और कौशल उन्नयन कार्यक्रमों ने इस क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है।

उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए चैंपियंस पोर्टल एक वरदान साबित हुआ है, जहां प्राप्त शिकायतों में से निन्यानवे प्रतिशत से अधिक का समयबद्ध निवारण किया गया। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई हैकाथॉन का पांचवां संस्करण और विलंबित भुगतान की समस्या सुलझाने के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान पोर्टल की शुरुआत की गई है। महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए यशस्विनी अभियान के तहत लाखों महिलाओं का उद्यम और उद्यम असिस्ट पोर्टल पर पंजीकरण कराया गया है, जो लैंगिक समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

मंत्रालय ने अपनी पहुंच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देते हुए मॉरीशस, थाईलैंड, स्लोवाकिया और मलेशिया जैसे देशों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। बोधगया में आयोजित पीएम विश्वकर्मा सम्मेलन और वाराणसी में एमएसएमई सेवा पर्व जैसे भव्य आयोजनों ने कारीगरों को आधुनिक टूलकिट और ऋण सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर भारत का सारथी बनाया है। साल के अंत में विशेष स्वच्छता अभियान के तहत सरकारी कार्यालयों से कबाड़ हटाकर न केवल लाखों रुपये का राजस्व कमाया गया, बल्कि कार्यस्थलों को स्वच्छ और ऊर्जावान बनाकर 'वेस्ट टू वेल्थ' का संदेश भी दिया गया। मंत्रालय की ये पहल स्पष्ट करती हैं कि भारत का एमएसएमई क्षेत्र अब अपनी विरासत को सहेजते हुए आधुनिक विकास की दौड़ में सबसे आगे खड़ा है।


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