वन विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों की जान पर खतरा, खतियानी परिवार ने उठाई मृतक के आश्रित को नौकरी देने की मांग
नरेश सोनी विशेष संवाददाता
हजारीबाग। जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों के बढ़ते आतंक और वन विभाग की कथित निष्क्रियता के खिलाफ खतियानी परिवार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। शनिवार को पुराना धरना स्थल के समीप अशोक राम की अध्यक्षता में आयोजित खतियानी परिवार की साप्ताहिक बैठक में केंद्रीय महासचिव मो. हकीम ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कटकमदाग प्रखंड के बनहा गांव में बीते शुक्रवार को हाथी के कुचलने से एक युवक की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज इंसानों की जान सस्ती और वन विभाग की सुरक्षा महंगी हो गई है। विभागीय पदाधिकारी आलीशान सरकारी आवासों में आराम फरमा रहे हैं, जबकि ग्रामीण डर के साये में रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
बैठक में मो. हकीम ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी और सुरक्षा गार्ड जनता की सुरक्षा करने के बजाय कोयला और बालू लदे ट्रकों से अवैध वसूली में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि बड़कागांव में एनटीपीसी द्वारा सैकड़ों एकड़ जंगल को जड़ से साफ कर दिया गया, लेकिन विभाग ने चुप्पी साध रखी है। ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग एनटीपीसी, कोल ब्लॉक और धनकुबेरों के हाथों बिक चुका है। जंगलों के विनाश के कारण ही आज बाघ और शेर जैसे जानवर लुप्त हो रहे हैं और हाथी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। जब जंगल ही नहीं बचेंगे, तो वन्यजीव सुरक्षित कहां रहेंगे और इसका सीधा खामियाजा आम ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
खतियानी परिवार ने सरकार से मांग की है कि जंगली जानवरों के हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को सिर्फ मुआवजा देना काफी नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। मो. हकीम ने यह भी सुझाव दिया कि पूर्व की सरकारों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गई वन समितियों को पुनर्जीवित किया जाए और जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को सौंपी जाए, तभी इस समस्या का समाधान संभव है। बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष बाबू भाई विद्रोही, रामावतार भगत, बोधी साँव, मो. आशिक, विजय मिश्रा, प्रदीप कुमार मेहता, मो. फखरुद्दीन, सुरेश महतो, अनवर हुसैन, मो. मुस्तकीम, अमर कुमार गुप्ता, शोएब अंसारी, चंदन कुमार, रीता देवी और आशा देवी समेत कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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