हजारीबाग/रामगढ़। रामगढ़ शहर के लोहार टोला में जनआस्था के केंद्र 'होलिका दहन स्थल' पर अवैध कब्जे के प्रयास ने तूल पकड़ लिया है। लगभग 75 वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में आ रही इस धार्मिक भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने की साजिश का आरोप लगा है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
साजिश का पुराना इतिहास, नया विवाद
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस जमीन पर कब्जे की नीयत आज की नहीं है। करीब 20 साल पहले भी भू-माफियाओं ने हाथ-पांव मारे थे, लेकिन तब जनशक्ति के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा था। अब एक बार फिर माफियाओं द्वारा पवित्र सार्वजनिक भूमि पर गिद्ध दृष्टि डालना दुर्भाग्यपूर्ण है।
विरोध करने पर बदसलूकी: शंकर चौधरी के साथ धक्का-मुक्की
इस पूरे प्रकरण में तब तनाव बढ़ गया जब रामगढ़ के आंदोलनकारी नेता और पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने मौके पर पहुँचकर अवैध निर्माण का विरोध किया। आरोप है कि कब्जे में संलिप्त लोगों ने उनके साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उनके साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी भी की गई। एक पूर्व जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यशवंत सिन्हा ने खोला मोर्चा, चुप्पी पर उठाए सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस घटना की तीखी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं, इस मामले में वर्तमान सांसद और विधायक की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अटल विचार मंच के प्रवक्ता अनिल सिन्हा ने बताया कि यशवंत सिन्हा ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रमुख मांगें: फर्जी कागजातों की जांच- जिस आधार पर कब्जे की कोशिश हो रही है, उन दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच हो।
दोषियों की गिरफ्तारी-पूर्व विधायक के साथ बदसलूकी करने वालों पर तुरंत एफआईआर हो।
स्थल का संरक्षण- प्रशासन स्पष्ट करे कि यह सार्वजनिक भूमि है ताकि भविष्य में ऐसी हिमाकत न हो।
"धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक संपत्ति से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस स्थल को मुक्त कराना चाहिए।" — अटल विचार मंच
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