मौत की घाटियों में अब लगेगा लगाम, हजारीबाग में 'रेड टॉपिंग' और चौड़ीकरण से सुरक्षित होगा सफर
सड़क हादसों के लिए कुख्यात हजारीबाग और आसपास की खतरनाक घाटियों में अब सफर सुरक्षित होने जा रहा है। हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल की पहल और निरंतर प्रयासों के बाद नेशनल हाईवे पर 'ब्लैक स्पॉट' यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। सांसद ने जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा के लिए सफल रहे 'रेड टॉपिंग' फॉर्मूले को अब हजारीबाग के जानलेवा रास्तों पर लागू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वाहनों की अनियंत्रित गति पर लगाम लगाकर बेगुनाह लोगों की जान बचाना है।
नेशनल हाईवे संख्या-2 पर स्थित धनुआ-भनुआ का जंगल क्षेत्र, जो अक्सर भीषण दुर्घटनाओं का गवाह बनता रहा है, वहां अब रेड टॉपिंग का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। यह तकनीक चालकों को सतर्क करने और घर्षण बढ़ाकर गति नियंत्रित करने में बेहद कारगर मानी जाती है। इसके अलावा रांची-हजारीबाग मार्ग पर स्थित चुटूपालू घाटी और हजारीबाग की चरही घाटी (यूपी मोड़) में भी व्यापक स्तर पर सुधार कार्य जारी हैं। इन क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण, विद्युतीकरण और चेतावनी वाले सिग्नेज लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है ताकि कोहरे या रात के अंधेरे में भी वाहन चालक सुरक्षित रह सकें।
सांसद मनीष जायसवाल ने बताया कि उन्होंने इन ब्लैक स्पॉट्स को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और एनएचएआई के शीर्ष अधिकारियों से कई दौर की वार्ता की थी और ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की थी। इन स्थानों पर अब तक हुई सैकड़ों दुर्घटनाओं में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। सांसद ने विश्वास जताया है कि इन सुधारात्मक कदमों के जमीनी परिणाम अब दिखने लगे हैं और जल्द ही ये खतरनाक रास्ते सुरक्षित मार्गों में तब्दील हो जाएंगे जिससे किसी भी परिवार को अब सड़क हादसे का दंश नहीं झेलना पड़ेगा
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