डिजिटल इंडिया की नई पहल- वन अधिकारों की रक्षा अब एआई और तकनीक के सहारे, मंत्रालय ने पांच युवा टीमों को सौंपी जिम्मेदारी
दिल्ली: जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन को तकनीकी रूप से सशक्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंत्रालय ने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 के मंच से उभरी प्रतिभाओं को केवल पुरस्कृत करने के बजाय उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस अनूठी पहल के तहत हैकाथॉन की सभी पांच अंतिम टीमों को एक संरचित पोस्ट-हैकाथॉन कार्यान्वयन कार्यक्रम में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है जो अब सरकार के साथ मिलकर काम करेंगी।
इस परियोजना का मूल उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एफआरए एटलस और वेबजीआईएस निर्णय समर्थन प्रणाली का विकास करना है ताकि वन अधिकारों की निगरानी सटीक और डेटा-आधारित हो सके। हैकाथॉन
के दौरान प्रस्तुत किए गए 390 से अधिक अभिनव समाधानों में से इन पांच टीमों ने अपनी तकनीकी दक्षता साबित की थी। सरकार ने केवल विजेता टीम पर निर्भर रहने के बजाय सभी शीर्ष पांच टीमों की प्रतिभा का उपयोग करने का फैसला किया है ताकि एक एकीकृत और व्यापक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का सह-विकास किया जा सके।
अगले दो महीनों तक चलने वाले इस गहन अभियान में ये युवा टेक्नोक्रेट्स राष्ट्रीय डिजिटल वास्तुकला को अंतिम रूप देंगे और उसे परिष्कृत करेंगे। यह सहभागिता नीतिगत पहलों को जमीनी हकीकत में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिससे सरकार, शिक्षाविदों और आदिवासी समुदायों के बीच सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होगा। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप है जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय विकास में समान भागीदार बनाया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल शासन में पारदर्शिता आएगी बल्कि वन अधिकारों के क्रियान्वयन में भी अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी।


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