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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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झारखंड में बाल विवाह कराने या समर्थन देने पर अब सीधे जेल! 1 लाख का जुर्माना और 2 साल की सजा तय

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 झारखंड में बाल विवाह कराने या समर्थन देने पर अब सीधे जेल! 1 लाख का जुर्माना और 2 साल की सजा तय

रांची: झारखंड सरकार ने राज्य को 'बाल विवाह मुक्त' बनाने के लिए अब कमर कस ली है। समाज कल्याण निदेशालय और महिला बाल विकास विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, अब कम उम्र में शादी करना या करवाना केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध माना जाएगा, जिसमें सीधी जेल हो सकती है।

उम्र सीमा और सजा का कड़ा प्रावधान

सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष अनिवार्य है। यदि इससे कम उम्र में विवाह किया जाता है, तो इसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं, बाल विवाह को बढ़ावा देने, उसमें शामिल होने या उसकी अनुमति देने वाले किसी भी व्यक्ति (चाहे वे परिजन हों, रिश्तेदार हों या विवाह कराने वाले पंडित/काजी) पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और साथ ही 2 साल तक की कठोर कैद हो सकती है।

CMPO को मिलीं विशेष शक्तियां

बाल विवाह निषेध अधिकारी (CMPO) को अब और अधिक सशक्त बनाया गया है। पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार, अधिकारी अब सीधे अदालत जाकर शादी रुकवाने के लिए 'निषेधाज्ञा आदेश' (Injunction Order - Section 13) ले सकते हैं। इसके अलावा, अधिकारियों को बाल विवाह को शून्य घोषित करने और बच्चे के भरण-पोषण व निवास के आदेश पारित करवाने का भी अधिकार दिया गया है।

शादी हो रही है तो क्या करें?

प्रशासन ने आम जनता के लिए भी गाइडलाइन जारी की है:

  1. अगर शादी होने वाली है: तुरंत पुलिस या 1098 पर सूचना दें। 24 घंटे के भीतर बच्चे को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया जाएगा।
  2. अगर शादी चल रही है: पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर गिरफ्तारियां कर सकती है (बीएनएसएस 2023, धारा 170 के तहत) और सबूत (निमंत्रण पत्र, फोटो) जब्त कर सकती है।
  3. कानूनी ढांचा: अब भारतीय न्याय संहिता 2023 और पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत भी मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री का संदेश

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में 'बाल विवाह मुक्त झारखंड' अभियान का उद्देश्य बेटियों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें सशक्त बनाना है। सरकार का स्पष्ट संदेश है—बचपन छीनने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

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