हजारीबाग के बानाहप्पा में आस्था का महाकुंभ, पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का शंखनाद, 11 किलोमीटर नंगे पांव चलकर 500 श्रद्धालुओं ने उठाई धर्म ध्वज
हजारीबाग: जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बानाहप्पा ग्राम में अध्यात्म और सनातन संस्कृति की एक अलौकिक बयार बह चली है। यहाँ आयोजित पांच दिवसीय भव्य प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का शुभारंभ एक ऐतिहासिक और विशाल कलश शोभायात्रा के साथ हुआ जिसने समूचे क्षेत्र को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया है। इस धार्मिक महाकुंभ में आस्था का ऐसा अदभुत ज्वार उमड़ा कि आसपास के पांच गांवों के ग्रामीण अपने समस्त भेदभाव भुलाकर धर्म के इस पुनीत कार्य में एक साथ एकजुट नजर आए। आयोजन के प्रथम दिवस पर पांच सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने, विशेषकर मातृशक्ति ने, अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए बानाहप्पा से लगभग ग्यारह किलोमीटर दूर स्थित पवित्र सिवाने नदी तक नंगे पांव पैदल यात्रा की। चिलचिलाती धूप और दुर्गम रास्ता भी इन श्रद्धालुओं के अटूट हौसले को डिगा नहीं सका और वैदिक मंत्रोच्चार व जयकारों के बीच पवित्र जल भरकर पुनः यज्ञ स्थल तक इनका आगमन हुआ।
इस महायज्ञ की भव्यता और दिव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन से पधारे विद्वान संतों और मनीषियों का आगमन हुआ है। इनके मुखारविंद से प्रवाहित होने वाले प्रवचन और कथा अमृत का रसपान क्षेत्र के श्रद्धालु अगले पांच दिनों तक कर सकेंगे, जिससे जनमानस में आध्यात्मिक चेतना का संचार होगा। स्थानीय निवासी और आयोजन से जुड़े तुलसी गुप्ता ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह पावन अनुष्ठान आगामी छह तारीख तक अनवरत जारी रहेगा। यज्ञ के सफल और विधि-सम्मत संचालन हेतु ग्यारह मुख्य यजमानों का चयन किया गया है, जिनमें अर्जुन गुप्ता, बबलू वर्मा, रणधीर वर्मा, सुखदेव राणा, मुकेश साव और आजाद गोप जैसे गणमान्य लोग शामिल हैं, जो पूर्ण निष्ठा और संयम के साथ पूजा कार्य संपन्न करवा रहे हैं।
इस संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान की अध्यक्षता रामजतन सिंह कर रहे हैं, जिनके मार्गदर्शन में पांचों गांवों के सामूहिक सहयोग से यह महायज्ञ अपने उद्देश्य की ओर अग्रसर है। ऐसी प्रबल संभावना भी जताई जा रही है कि अनुष्ठान के दौरान शंकराचार्य जी का भी पदार्पण हो सकता है, जिससे इस यज्ञ की पवित्रता और महत्ता और अधिक द्विगुणित हो जाएगी। फिलहाल, यज्ञ मंडप में गूंजते वेद मंत्रों, शंखनाद और हवन की सुगंध ने पूरे बानाहप्पा और समीपवर्ती क्षेत्रों के वातावरण को देवमय बना दिया है, जहां हर तरफ सिर्फ और सिर्फ ईश्वरीय आराधना की गूंज सुनाई दे रही है।





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