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Editor: Naresh Prasad Soni
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा मत्स्य पालन: बरही में चीफ जस्टिस ने केज कल्चर को सराहा, मछलियों को खिलाया दाना

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा मत्स्य पालन,


बरही में चीफ जस्टिस ने केज कल्चर को सराहा, मछलियों को खिलाया दाना

हजारीबाग/बरही। झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक शनिवार को हजारीबाग दौरे के दौरान एक अलग अंदाज में नजर आए। अदालती कार्यवाही और निरीक्षण से इतर वे बरही क्षेत्र के जलाशय पहुंचे, जहां उन्होंने मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीक 'केज कल्चर' का बारीकी से अवलोकन किया। मुख्य न्यायाधीश ने न केवल जल के बीच स्थापित केज व्यवस्था को देखा, बल्कि वहां मौजूद मत्स्य पालकों से आत्मीय संवाद कर उनकी कार्यशैली और अनुभवों को भी साझा किया।

​जलाशय के नैसर्गिक वातावरण के बीच मुख्य न्यायाधीश ने मत्स्य पालन की इस उन्नत विधि की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि केज कल्चर जैसी पहल ग्रामीण आजीविका के संवर्धन और मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही है। उनका मानना था कि यह तकनीक न केवल रोजगार के नए द्वार खोलेगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती प्रदान करेगी। निरीक्षण के दौरान एक सुखद दृश्य तब देखने को मिला जब मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं अपने हाथों से मछलियों को दाना खिलाया और किसानों का उत्साहवर्धन किया।

​इस मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार और जिला मत्स्य पदाधिकारी प्रदीप कुमार भी उनके साथ मौजूद रहे। मुख्य न्यायाधीश ने मत्स्य पालकों को निरंतर प्रगति और नवाचार के लिए शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों का मानना है कि राज्य के सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा किए गए इस निरीक्षण और प्रोत्साहन से क्षेत्र के किसानों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

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