विकास निधि के लिए टुकड़ों में नहीं बंटेगी राशि, सांसद ने साफ की तस्वीर
विधायक रोशन लाल ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- विस्थापितों के हक की बात करने वाले खुद ईडी के घेरे में
हजारीबाग: होटल रिसॉर्ट्स में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल, बरही विधायक मनोज यादव और बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान नेताओं ने वीबी जी-राम-जी बिल को लेकर अपनी बात रखी और साथ ही क्षेत्र के विकास और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर बेबाकी से जवाब दिया। सांसद निधि के उपयोग और विस्थापितों के मुद्दों पर नेताओं ने अपना विजन स्पष्ट करते हुए विरोधियों को कड़ा संदेश दिया।
प्रेस वार्ता के दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने अपने संसदीय फंड के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों पर पूर्ण विराम लगा दिया। फंड में आए एक करोड़ अस्सी लाख रुपये के अब तक इस्तेमाल न होने के सवाल पर सांसद ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों को टुकड़ों में करने से धरातल पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिखता। उन्होंने अपनी कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि एक सांसद को सालाना पांच करोड़ रुपये मिलते हैं और यदि इसे पूरे लोकसभा क्षेत्र की हर पंचायत में बराबर बांटा जाए तो एक पंचायत के हिस्से में महज सवा लाख रुपये ही आएंगे जिससे कोई बड़ा या स्थायी निर्माण संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने निर्णय लिया है कि वे दो साल की राशि को एक साथ जोड़कर आवंटित करेंगे। उनकी योजना है कि लगभग तीन सौ पंचायतों में पांच-पांच लाख रुपये की राशि दी जाए ताकि हर पंचायत में कम से कम एक ठोस और बड़ा काम दिखाई दे। सांसद ने इसे अपने विवेक के आधार पर क्षेत्र के विकास के लिए लिया गया एक रणनीतिक फैसला बताया और स्पष्ट किया कि भविष्य में भी वे इसी तर्ज पर दो साल के अंतराल पर एकमुश्त राशि जारी करेंगे ताकि जनता के पैसे का सही और भरपूर उपयोग हो सके।
वहीं दूसरी ओर बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं और यह हताशा का परिणाम हैं। विधायक ने बिना नाम लिए पूर्व के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार पंद्रह सालों तक एक ही पार्टी और एक ही परिवार ने क्षेत्र का नेतृत्व किया और उन्हीं के कार्यकाल में तमाम खदानें खोली गईं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यदि पूर्व का नेतृत्व ईमानदार होता और उन्होंने जनता को उनका अधिकार दिलाया होता तो आज उनके बैंक खाते सील नहीं होते और न ही करोड़ों रुपये ईडी जैसी एजेंसियों द्वारा जब्त किए जाते। विधायक ने अपने कार्यकाल का ब्यौरा देते हुए दावा किया कि पिछले एक साल में विधानसभा के चार सत्रों के दौरान सबसे अधिक विस्थापितों और प्रभावितों की आवाज बड़कागांव विधायक ने ही सदन में उठाई है जो कि ऑन रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने आश्वस्त किया कि चाहे जिला प्रशासन हो या एनटीपीसी प्रबंधन, वे विस्थापितों के हक के लिए लगातार संघर्षरत हैं और जब भी जनता उन्हें याद करती है वे उनके बीच मौजूद रहते हैं।


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