अडाणी के प्रलोभन और प्रशासन के मुकदमों से नहीं टूटेगी ग्रामीणों की चट्टानी एकता, खतियानी परिवार ने भरी हुंकार
हजारीबाग: पुराना धरना स्थल के समीप शनिवार को खतियानी परिवार की साप्ताहिक बैठक राम अवतार भगत की अध्यक्षता में संपन्न हुई जिसमें बड़कागांव के गोंदलपुरा पंचायत में कोयला कंपनियों के खिलाफ चल रहे ग्रामीणों के आंदोलन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताया गया। बैठक में संगठन के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने हुंकार भरते हुए कहा कि अडाणी कोल ग्रुप को वहां कोयला खनन की अनुमति मिलने के बाद से ही कंपनी ग्रामीणों की एकता को खंडित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। आरोप लगाया गया कि कंपनी द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों को स्वरोजगार के नाम पर मासिक भत्ता देकर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है मगर गोंदलपुरा के ग्रामीण चट्टानी एकता का परिचय देते हुए टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।
खतियानी परिवार ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और कहा कि स्थानीय प्रशासन कंपनियों के प्रभाव में आकर निर्दोष ग्रामीणों को उल-जलूल मुकदमों में फंसा रहा है जिससे आंदोलन दबने के बजाय और अधिक व्यापक रूप लेता जा रहा है। बैठक में चर्चा की गई कि जिन क्षेत्रों में ग्रामीणों ने कंपनियों से मुआवजा ले भी लिया है वहां भी अब विरोध की सुगबुगाहट शुरू हो गई है और भारत सरकार की हीरक कंपनी एनटीपीसी को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण किसी के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं हैं और बड़कागांव में खनन के कारण पर्यावरण इतना दूषित हो चुका है कि आम जनजीवन विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है जिसके आगे सरकारी नियम भी बौने साबित हो रहे हैं।
संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीणों पर लादे गए फर्जी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं। साथ ही यह शर्त रखी गई कि यदि कंपनियां वेस्ट बोकारो ग्रुप ऑफ टाटा कोलियरी और सीसीएल पिपरवार क्षेत्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं तभी विरोध प्रदर्शन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा अन्यथा खतियानी परिवार भी इस लड़ाई में ग्रामीणों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से मेघन मेहता, अधिवक्ता गुलाम जिलानी, अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ, डॉ तनवीर अहमद, प्रदीप कुमार मेहता, शोएब अंसारी, मोहम्मद आशिक, विजय मिश्रा, मोहम्मद फखरुद्दीन, नसीरुद्दीन अंसारी, अमर कुमार गुप्ता और सुरेश महतो समेत कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिन्होंने आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई।

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