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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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बंगाल में लोकतंत्र नहीं 'ममता-तंत्र', ईडी पर हमले भाजपा-टीएमसी की चुनावी मैच फिक्सिंग

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बंगाल में लोकतंत्र नहीं 'ममता-तंत्र', ईडी पर हमले भाजपा-टीएमसी की चुनावी मैच फिक्सिंग

हजारीबाग: कांग्रेस पार्टी की केंद्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने हजारीबाग में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था और मौजूदा राजनीतिक हालात पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की स्थिति को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि वहां इस वक्त न तो लोकतंत्र बचा है और न ही राजतंत्र, बल्कि वहां पूरी तरह से 'ममता-तंत्र' हावी है। अंबा प्रसाद ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हो रहे लगातार हमलों को महज एक संयोग मानने से इनकार करते हुए इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच की एक सोची-समझी 'मैच फिक्सिंग' करार दिया।

पूर्व विधायक ने अपने बयान में आरोप लगाया कि बंगाल में केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी एक बार नहीं, बल्कि तीन-तीन बार पिट चुकी है, लेकिन इसके बावजूद दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जो ईडी दूसरे राज्यों में मुख्यमंत्रियों तक को जेल भेजने में देर नहीं करती, वह बंगाल में अपने ही अधिकारियों के सिर फूटने और फाइलें छिन जाने पर खामोश क्यों है? अंबा प्रसाद ने दावा किया कि यह पूरा घटनाक्रम एक चुनावी प्रोपेगेंडा का हिस्सा है। उनके मुताबिक, भाजपा यह भली-भांति जानती है कि बंगाल में उसकी जीत की कोई संभावना नहीं है, इसलिए टीएमसी और भाजपा ने अंदरखाने सेटिंग कर ली है। दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ रैलियां निकालकर विरोध का नाटक कर रहे हैं ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके और कांग्रेस जैसी पार्टियों को सियासी मुकाबले से बाहर रखा जा सके।

प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेत्री ने कहा कि जब ईडी पर हमले हो रहे थे और उनसे फाइलें छीनी जा रही थीं, तब वहां डीजीपी और मुख्य सचिव जैसे शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, लेकिन कानून का पालन कराने के बजाय वे तमाशबीन बने रहे। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि बंगाल में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और वहां संघीय ढांचे का कोई सम्मान नहीं बचा है। हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है मानो ईडी के अधिकारी पश्चिम बंगाल नहीं, बल्कि बांग्लादेश गए हों। संदेशखाली में शाहजहां शेख जैसे तत्वों द्वारा अधिकारियों पर किए गए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां शासन का नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल का निजी कानून चल रहा है।

केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय पर तंज कसते हुए अंबा प्रसाद ने सुझाव दिया कि अब ईडी अधिकारियों के लिए एक अलग से 'कोष' बनाया जाना चाहिए और उनका भारी-भरकम लाइफ इंश्योरेंस करवाया जाना चाहिए, क्योंकि बंगाल जाने पर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद ईडी के अधिकारियों की शहादत पर ही भाजपा के कमल खिलेंगे और उनकी राजनीति चमकेगी। अंत में, उन्होंने बंगाल की जनता को समझदार बताते हुए कहा कि वहां के लोग इस नफरत की राजनीति और टीएमसी-भाजपा के इस चुनावी नाटक को बखूबी समझ रहे हैं और समय आने पर इसका जवाब देंगे। यह पूरा प्रकरण कानून के राज का मखौल उड़ाने जैसा है, जिसने केंद्रीय एजेंसियों की साख पर भी गहरा बट्टा लगा दिया है।


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