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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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बेटी का भविष्य और सपनों की उड़ान, सुकन्या समृद्धि योजना के 11 सफल वर्ष और करोड़ों परिवारों का अटूट विश्वास

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बेटी का भविष्य और सपनों की उड़ान,

सुकन्या समृद्धि योजना के 11 सफल वर्ष और करोड़ों परिवारों का अटूट विश्वास

राष्ट्रीय: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सुकन्या समृद्धि' ने अपने सफल क्रियान्वयन के 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं, जो देश की बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। 22 जनवरी 2015 को 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत शुरू की गई इस पहल ने महज एक बचत योजना से ऊपर उठकर एक राष्ट्रव्यापी सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश भर में 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। यह बड़ी उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय परिवारों ने अपनी बेटियों की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए इस सरकारी गारंटी वाली योजना पर कितना गहरा भरोसा जताया है।

वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की आकर्षक ब्याज दर के साथ यह योजना लघु बचत के क्षेत्र में सबसे अधिक लाभ देने वाले माध्यमों में से एक बनी हुई है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व के विजन के अनुरूप, यह योजना बालिकाओं के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा और विवाह तक के वित्तीय बोझ को कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है। अभिभावक मात्र 250 रुपये की न्यूनतम राशि से अपनी 10 वर्ष तक की आयु की बेटी के लिए किसी भी डाकघर या अधिकृत बैंक में यह खाता खोल सकते हैं। योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका कर-मुक्त होना और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलना है, जो लंबी अवधि में एक बड़ा कोष तैयार करने में मदद करता है।

सामाजिक बदलाव के दृष्टिकोण से देखें तो सुकन्या समृद्धि योजना ने बालिकाओं के प्रति समाज की सोच को बदलने का काम किया है। 18 वर्ष की आयु होने पर बालिका स्वयं अपने खाते का नियंत्रण ले सकती है, जो उसे वित्तीय निर्णय लेने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करता है। शैक्षणिक खर्चों के लिए 50 प्रतिशत तक की निकासी की सुविधा यह सुनिश्चित करती है कि पैसों की कमी किसी भी बेटी की पढ़ाई में बाधा न बने। 'विकसित भारत' के संकल्प की सिद्धि में यह योजना आधी आबादी को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ रही है, जिससे हर बेटी को अपनी पूरी क्षमता और सपनों को साकार करने का समान अवसर मिल रहा है।

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