बड़कागांव में 'कंपनी राज' और पुलिसिया दमन के विरुद्ध राजभवन पहुंची विस्थापितों की आवाज, राज्यपाल ने दिया त्वरित न्याय का भरोसा
राँची: बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में चल रहे औद्योगिक उपक्रमों की आड़ में कॉर्पोरेट मनमानी और प्रशासनिक दमन के खिलाफ अब विस्थापितों का आक्रोश राजभवन की दहलीज तक जा पहुंचा है। पूर्व कृषि मंत्री एवं बिरसा विस्थापन यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष योगेंद्र साव तथा पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के नेतृत्व में आज एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर क्षेत्र में व्याप्त अराजकता और मानवाधिकार हनन के मामलों में तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई। यह मुलाकात 31 दिसंबर से पगार स्थित कर्बला मैदान में चल रहे अनवरत आंदोलन की अगली कड़ी थी, जहाँ विस्थापित भू-रैयत अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
राज्यपाल को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी और उसकी सहयोगी कंपनियों—अडानी, ऋत्विक माइनिंग, बीजीआर और एनएमडीसी—पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पकरी बरवाडीह, गोंदलपुरा, मोइत्रा, बादाम, केरेडारी और चट्टी बारियातु जैसे कोल ब्लॉकों में जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह से कंपनियों के प्रभाव में कार्य कर रहा है। आरोप है कि आर्थिक प्रलोभन के वशीभूत होकर स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों पर कहर बरपा रहा है, जिसमें फर्जी मुकदमे लादना, निर्दोष ग्रामीणों के साथ मारपीट, संपत्ति की लूट और यहाँ तक कि महिलाओं के साथ अभद्रता व राष्ट्रीय ध्वज का अपमान जैसी शर्मनाक घटनाएं शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल व्याप्त है।
मुलाकात के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने महामहिम के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह संघर्ष मात्र जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों, उनकी अस्मिता और जीवन की गरिमा को बचाने का है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून बदल चुका है, लेकिन कंपनियों की मानसिकता और पुलिसिया बर्बरता बदस्तूर जारी है। वहीं, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने क्षेत्र की भयावह स्थिति का चित्रण करते हुए कहा कि बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं को योजनाबद्ध तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके। उन्होंने मांग की कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी श्री अनिल पलटा के नेतृत्व में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए जो दोषी अधिकारियों और कंपनी के कारिंदों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे, साथ ही विस्थापितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास का हक मिले।
प्रतिनिधिमंडल की व्यथा को गंभीरता से सुनते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने आश्वस्त किया है कि सोमवार को कार्यालय खुलते ही इस संवेदनशील मामले पर त्वरित संज्ञान लिया जाएगा और उचित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राजभवन से मिले इस आश्वासन के बाद हताश ग्रामीणों में न्याय की एक नई उम्मीद जागी है। इस प्रतिनिधिमंडल में अधिवक्ता तापेश्वर कुमार, मोहम्मद दिलदार अंसारी, संजय कुमार और संजीत सहित कई प्रभावित भू-रैयत शामिल थे। अब देखना यह होगा कि राजभवन के हस्तक्षेप के बाद क्या बड़कागांव के विस्थापितों को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत उनका वाजिब हक मिल पाता है और क्या बेलगाम नौकरशाही पर नकेल कसी जा सकेगी।


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