वैश्विक चुनौतियों को ठेंगा दिखा कुलांचे भर रही भारतीय अर्थव्यवस्था, बजट 2026 ने खींचा 10 फीसदी विकास दर का 'सुपर ब्लूप्रिंट'
नई दिल्ली: संसद के पटल पर आज एक ऐसे सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर उभरी है जिसने तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी आर्थिक संप्रभुता का लोहा मनवाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 के साथ जो वृहद आर्थिक रूपरेखा प्रस्तुत की है वह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था केवल चल नहीं रही है बल्कि दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। जहाँ दुनिया की बड़ी ताकतें मंदी और महंगाई के भंवर में फंसी हैं वहीं भारत ने 7.4 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाकर यह साबित कर दिया है कि विकास का असली इंजन अब एशिया के इसी उपमहाद्वीप में धड़क रहा है।
वित्त मंत्री ने आंकड़ों के जरिए देश को आश्वस्त किया है कि आगामी वित्त वर्ष में नॉमिनल जीडीपी 10 प्रतिशत की दर से छलांग लगाएगी। यह बजट केवल बही-खाते का हिसाब नहीं है बल्कि 'विकसित भारत' के संकल्प की एक ठोस प्रतिज्ञा है। सेवा क्षेत्र 9.1 प्रतिशत की रफ़्तार से विस्तार करते हुए विकास का प्रमुख सारथी बना हुआ है। सबसे सुखद पहलू यह है कि भारतीय उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास 2012 के बाद अपने चरम पर है। निजी खपत व्यय जीडीपी का 61.5 प्रतिशत हो गया है जो यह दर्शाता है कि आम भारतीय की क्रय शक्ति बढ़ी है और घरेलू मांग ही हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। यूपीआई से लेकर हवाई और रेल यात्राओं तक के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि शहरी और ग्रामीण भारत दोनों में जबरदस्त आर्थिक हलचल है।
सरकार ने अपनी तिजोरी का मुंह बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूरी तरह खोल दिया है। प्रभावी पूंजीगत व्यय के लिए 17.15 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है। इसका सीधा अर्थ है कि देश में सड़कों, पुलों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा जाल बिछेगा जो रोजगार और तरक्की के नए द्वार खोलेगा। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने राजकोषीय अनुशासन का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत पर सीमित रखने और सरकारी कर्ज को घटाकर 55.6 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है जो वित्तीय समझदारी का परिचायक है।
सहकारी संघवाद की भावना को प्रबल करते हुए वित्त आयोग के माध्यम से राज्यों को 16.56 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का प्रस्ताव है जिससे राज्य भी विकास की इस दौड़ में कदम से कदम मिलाकर चल सकें। वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी धमक बरकरार रखी है। अनिश्चित शुल्क परिदृश्यों और अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंकाओं के बावजूद भारत का कुल निर्यात 825.3 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का 81 बिलियन डॉलर का आंकड़ा यह बताता है कि दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा भारत की विकास गाथा पर अटूट है। कुल मिलाकर यह बजट दस्तावेज भारत के आर्थिक उत्कर्ष का वह घोषणापत्र है जो आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ और अजेय बनाएगा।



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